मालदीव में सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच टकराव के बाद राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने वहां 15 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया था. यह घोषणा पांच फरवरी को हुई थी और इसकी मियाद मंगलवार को पूरी हो रही है. ऐसे में भारत ने उम्मीद जताई है कि मालदीव सरकार अब आपातकाल को और आगे नहीं बढ़ाएगी.

इस संबंध में भारत के विदेश मंंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है, ‘अब यह आवश्यक है कि मालदीव जल्दी से लोकतंत्र की राह पर लौटे. वहां के नागरिक भी देश में कानून का शासन चाहते हैं. विश्व समुदाय भी वहां शांति की चाह रखता है.’ इस बयान के जरिए भारत सरकार ने यह उम्मीद भी जताई है कि देश में सामान्य परिस्थितियां कायम होने के बाद न्यायपालिका को स्वतंत्रता और पारदर्शिता के साथ काम करने का मौका मिलेगा. इससे पहले भारत ने 16 फरवरी को आपातकाल हटाने की अपील की थी.

उधर सोमवार को राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने मालदीव की संसद की एक समिति के सामने एक प्रस्ताव रखा है जिसके तहत आपातकाल 15 और दिनों के लिए बढ़ाया जाना है. संसद से इस प्रस्ताव की मंजूरी के लिए वोटिंग के दौरान कम से कम 43 सांसदों की उपस्थिति जरूरी है. इस पर यमीन के करीबी सांसद अहमद मानिक ने कहा है कि इन्हें इस प्रस्ताव के संसद से पारित होने की पूरी उम्मीद है.