अभिनेता कमल हासन ने बुधवार को अपनी पार्टी मक्कल नीति मय्यम का ऐलान कर दिया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इस मौके पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उनके साथ मौजूद थे. अभिनय से राजनीति में कदम रखने के बारे में कमल हासन ने बताया कि उनके इस क्षेत्र में उतरने का मकसद उस स्थिति को चुनौती देना है, जिसमें तमिलनाडु की राजनीति उलझी हुई है. उधर, कांग्रेस के नेता वीरप्पा मोइली ने कहा है कि राज्य में कमल हासन की पार्टी के लिए बहुत ज्यादा जगह नहीं है.’

दिल्ली : सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बड़े पैमाने पर छात्र नशे के आदी

दिल्ली स्थित नगर निगम के प्राथमिक स्कूलों में बड़ी संख्या में छात्र नशे के आदी हो रहे हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जुवेनाइल जस्टिस कमिटी की निगरानी में हुई एक जांच में सात से 10 साल के 18,000 में से 1820 बच्चे नशीली चीजों का सेवन करते हुए पाए गए. इनमें इन्हेलर्स, कफ सीरप, स्प्रिरिट, तम्बाकू और गुटका शामिल हैं. यह जांच दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद किया गया था. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने छात्रों को जल्द से जल्द नशे के लत से मुक्त करने पर जोर दिया है. विभाग का कहना है कि इनके किशोर होने तक ये नशे के जाल में बुरी तरह फंस कर आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं.

तृणमूल कांग्रेस ने पीएनबी मामले पर जेपीसी के गठन का विरोध किया

अगले साल होने वाले आम चुनाव को देखते हुए विपक्षी एकता को और एक बड़ा झटका लगा है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने पीएनबी धोखाधड़ी मामले पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित किए जाने का विरोध किया है. तृणमूल कांग्रेस के राज्य सभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन का कहना है, ‘जेपीसी बहुत लंबा समय लेने वाली प्रक्रिया है. बीते 13 वर्षों में आठ जेपीसी बनी और इनमें से कोई तथ्यपरक रिपोर्ट नहीं निकली.’ दूसरी ओर, कांग्रेस और वाम दल इसकी मांग कर रहे हैं. वाम दलों का कहना है कि वे इस घोटाले की तह तक जाना चाहते हैं. सीपीएम का कहना है कि मौजूदा वित्त मंत्री को जेपीसी के सामने पेश होकर सभी जरूरी सवालों के जवाब देने होंगे.

केंद्र चुनाव आयुक्तों को बर्खास्तगी के खिलाफ संवैधानिक संरक्षण देने के पक्ष में नहीं

केंद्र सरकार चुनाव आयुक्तों की बर्खास्तगी को लेकर उन्हें संवैधानिक संरक्षण देने के पक्ष में नहीं है. दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक इस बारे में सरकार का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में संशोधन के लिए राजनीतिक सहमति बनाने की जरुरत होगी. इस अनुच्छेद में संशोधन किए जाने के बाद ही बर्खास्त करने की स्थिति में चुनाव आयुक्तों को संवैधानिक संरक्षण दिया जा सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में दायर एक याचिका पर केंद्र से जवाब भी मांगा है. इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीआईसी) के अलावा अन्य आयुक्तों को भी संवैधानिक संरक्षण देने की मांग की गई है. संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक सीआईसी को संसद में महाभियोग के बाद ही बर्खास्त किया जा सकता है. दूसरी ओर, आयुक्तों को सीआईसी की सिफारिश पर राष्ट्रपति बर्खास्त कर सकते हैं.

पश्चिम बंगाल : भाजपा सांसद रूपा गांगुली ने दिलीप घोष को निशाने पर लिया

भाजपा की राज्य सभा सांसद रूपा गांगुली ने पश्चिम बंगाल में पार्टी अध्यक्ष दिलीप घोष को ट्वीट कर निशाने पर लिया है. द हिंदू के मुताबिक एक ट्वीट कर उन्होंने दिलीप घोष पर उनकी फोन कॉल का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है. हालांकि, इसके कुछ देर बाद ही रूपा गांगुली ने इस ट्वीट को हटा दिया. दूसरी ओर, दिलीप घोष ने इस बात से इनकार किया है. उन्होंने आगे कहा, ‘समझ नहीं आता कि वे मुझसे बात करने की जगह सोशल मीडिया पर इस तरह के आरोप क्यों लगा रही हैं.’ अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि राज्य सभा सांसद की इस शिकायत के पीछे की वजह पार्टी प्रचार तंत्र द्वारा उनकी उपेक्षा करना है.