दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार वीके जैन ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने दो आप विधायकों को अंशु प्रकाश पर हमला करते देखा था. विधायक अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल फिलहाल 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं. इससे पहले जैन ने कहा था कि वे घटना के वक्त शौचालय में थे और वास्तव में क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर सोमवार देर रात जो हुआ वह किसी रहस्य से कम नहीं है. सुनी-सुनाई है कि मुख्यमंत्री के घर पर कमरे में उस वक्त 14 लोग थे. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के 11 नेता. मुलाकात से पहले क्या हुआ और मुलाकात के बाद क्या हुआ, इसे लेकर केजरीवाल के करीबी नेताओं और मुख्य सचिव के करीबी अफसरों से बात करने के बाद कुछ हद तक तस्वीर साफ होती दिखती है.

सबसे पहले बात उन 11 नेताओं की जिनकी मुश्किल बढ़ सकती है. सुनी-सुनाई है कि पुलिस की जांच के दायरे में आम आदमी पार्टी के सिर्फ दो विधायक नहीं है. पूरे 11 विधायकों पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है. पहले विधायक हैं, अजय दत्त. ये अंबेडकर नगर विधानसभा से पहली बार विधायक बने थे. कमरे में दूसरे विधायक थे प्रकाश जारवाल, देवली से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं. पुलिस की डायरी में इन पर दो और पुराने मामले हैं. इन पर दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों से मारपीट और एक बदसलूकी का मामला पहले से चल रहा है. फिलहाल ये मुख्य सचिव से मारपीट के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं.

तीसरे विधायक हैं, राजेश ऋषि. जनकपुरी से पहली बार विधायक बने राजेश ऋषि को चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के केस में अयोग्य करार दिया गया है. राजेश गुप्ता पांचवें शख्स थे जो इस पूरी घटना के चश्मदीद गवाह हैं. ये वज़ीरपुर से पहली बार विधायक बने हैं और इन पर भी दिल्ली पुलिस की नज़र है. ऋतुराज गोविंद किराड़ी से पहली बार विधायक बने हैं और सुनी-सुनाई है कि वे भी केजरीवाल के साथ उस कमरे में मौजूद थे. इन पर भी एमसीडी के एक इंजीनियर पर हमले करने का मामला पहले से चल रहा है.

सूत्रों के मुताबिक कस्तूरबा नगर के विधायक मदनलाल भी उस वक्त अरविंद केजरीवाल के घर पर मौजूद थे. उन्हें भी चुनाव आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है. ओखला के विधायक अमानतुल्लाह खान तो गिरफ्तार हो ही चुके हैं. इन्हीं पर सबसे संगीन आरोप हैं. इन्हें भी फिर चुनाव लड़ना पड़ सकता है क्योंकि इन्हें भी चुनाव आयोग ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट केस में इनकों भी अयोग्य करार दे दिया है.

सुनी-सुनाई है कि जंगपुरा से पहली बार विधायक बने प्रवीण कुमार भी उसी कमरे में मौजूद थे जहां मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को बुलाया गया था. इनकी विधायकी भी जा चुकी है और इन्हें भी चुनाव लड़ना पड़ सकता है. संगम विहार से चुनाव जीते दिनेश मोहनिया भी वहां पर थे. इन पर भी दिल्ली में एक मुकदमा चल रहा है. बुराड़ी से विधायक बने संजीव झा का नाम भी दिल्ली पुलिस की लिस्ट में मौजूद है. बताया जा रहा है कि ये भी उस जगह बैठे थे जहां मुख्य सचिव को बातचीत के लिए बुलाया गया था. संजीव झा को भी चुनाव आयोग ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट केस में अयोग्य करार दिया है. सुनी-सुनाई यह भी है लक्ष्मी नगर से विधायक बने नितिन त्यागी भी वहीं थे. अरविंद केजरीवाल के दफ्तर से जारी सीसीटीवी तस्वीरों में वे मुख्य सचिव के साथ दिखते भी हैं.

आम आदमी पार्टी के कई नेताओं से बातचीत के बाद कुछ बातें सामने आई हैं. अरविंद केजरीवाल के यहां 11 विधायकों को बुलाया गया था. एजेंडे पर चुनाव था. इन 11 विधायकों में से छह विधायकों को चुनाव आयोग ने अयोग्य बताया है और इन्हें फिर से चुनाव लड़ना पड़ सकता है. तीन विधायकों पर पहले से ही मुकदमा चल रहा है. केजरीवाल के एक करीबी नेता बताते हैं कि आम आदमी पार्टी अभी से दिल्ली के 20 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर चुकी है.

बहरहाल मुख्य बात पर आते हैं. केजरीवाल सरकार के तीन साल पूरे होने पर दिल्ली सरकार ने विज्ञापन का लंबा चौड़ा बजट बनाया था. सुनी-सुनाई है कि यह फाइल मुख्य सचिव के पास थी जिसे वे पास नहीं कर रहे थे. केजरीवाल के विधायकों को चिंता थी कि अभी तक उनके इलाके में प्रचार का काम शुरू नहीं हो पाया है इसलिए वे मुख्यमंत्री से मिलने आए थे. यह विधायक रात आठ बजे से ही आने शुरू हो गए थे. पहले मुख्य सचिव को रात साढ़े आठ बजे बुलाया गया था. इसके बाद उन्हें रात 11 बजे आने के लिए कहा गया.

मुख्य सचिव के करीबी एक अफसर बताते हैं कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब मुख्यमंत्री के घर अफसरों को देर रात बुलाया गया हो. इस बार भी मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के घर गए तो अंदर कमरे के नज़ारा बदला हुआ था. पहले से ही कमरे में विधायक मौजूद थे. अमूमन मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री के पास बिठाया जाता है, लेकिन यहां मुख्य सचिव को दो विधायकों के बीच में एक सोफे पर बैठने के लिए कहा गया. अफसर बताते हैं कि ऐसा भी पहली बार नहीं हुआ. केजरीवाल सरकार में ऐसा कई बार हो चुका है जब अफसरों को मुख्यमंत्री उचित सम्मान नहीं देते.

नेताओं से बात करने के बाद पता चला कि मुख्य सचिव को अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल के बीच में ही बिठाया गया था. पहले बात विज्ञापन पर शुरू हुई और जब मुख्य सचिव की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो विधायकों ने अपने इलाके में राशन न मिलने का मुद्दा उठा दिया. जब हंगामा बढ़ा तो मुख्य सचिव जाने लगे. सुनी-सुनाई है कि इसी दौरान उनके बगल में बैठे विधायकों ने बदसलूकी शुरू कर दी. बताते हैं कि उस वक्त तक अरविंद केजरीवाल वहां बैठे थे. जब बात हाथापाई तक पहुंची तो नितिन त्यागी जैसे कुछ विधायकों ने इसे रोकने की कोशिश की.

इसके बाद मुख्य सचिव कार की तरफ बढ़े और अपने घर आ गए. सूत्रों के मुताबिक घर आकर उन्होंने अपने ऊपर के दो अफसरों को पूरी बात बताई. फिर उन्हें अस्पताल भेजा गया. दिल्ली सरकार के ही अस्पताल में उनकी जांच हुई. दिल्ली पुलिस की टीम को भी तब तक खबर कर दी गई थी.

जानकारों के मुताबिक अब धीरे-धीरे यह मामला और बढ़ेगा. कइयों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल भी इसे शांत नहीं करना चाहते क्योंकि अगर दिल्ली में 20 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए तो वे केंद्र सरकार पर परेशान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश रचने का आरोप लगाएंगे. लेकिन सूत्र बताते हैं कि उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया जाएगा. यानी पुलिस फिलहाल अरविंद केजरीवाल पर किसी भी तरह का एक्शन नहीं लेगी.