मालदीव ने भारत के उस बयान को नकार दिया है जिसमें उसने मालदीव सरकार द्वारा आपातकाल को 30 दिन तक बढ़ाए जाने को लेकर चिंता जाहिर की थी. एक बयान जारी कर मालदीव सरकार ने कहा कि अपने बयान में भारत ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. बुधवार को भारत ने कहा था कि मालदीव में आपातकाल की अवधि बढ़ने से उसे काफी निराशा हुई है. उसने यह भी कहा कि इस अवधि के बढ़ने की कोई जायज वजह नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक भारत के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार को मालदीव सरकार ने कहा, ‘मालदीव की सरकार ने भारत सरकार के सार्वजनिक बयानों पर गौर किया है. ये बयान मालदीव में चल रही राजनतीकि गतिविधियों से संबंधित तथ्यों और जमीनी हकीकत की अनदेखी करते हैं. भारत सरकार का यह दावा कि आपातकाल का बढ़ना असंवैधानिक है, मालदीव के संविधान और कानून की अनदेखी करता है.’

इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था, ‘हम ईमानदारी से चाहते हैं कि मालदीव में लोकतंत्र की बहाली हो. मालदीव के लोग भी यही चाहते हैं. आपातकाल को बढ़ाने की कोई जायज वजह हमें नजर नहीं आती.’ रवीश कुमार ने मालदीव सरकार से अपील की थी कि वह वहां के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राजनीतिक कैदियों को रिहा करे.

बीती पांच फरवरी को मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने आपातकाल की घोषणा की थी. मंगलवार को उसकी मियाद खत्म होनी थी. भारत ने उम्मीद जताई थी कि मालदीव सरकार आपातकाल को आगे नहीं बढ़ाएगी. लेकिन सरकार ने इसकी मियाद 30 दिन के लिए बढ़ा दी.