पाकिस्तान एक बार फिर टेरर फंडिंग रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहने वाले देशों में शामिल हो गया है. खबरों के अनुसार आतंकियों के वित्त पोषण और मनी लॉन्डरिंग पर निगाह रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया है. एफएटीएफ ने चीन द्वारा अपनी आपत्ति हटाए जाने के बाद यह कदम उठाया है. इससे जुड़ी एफएटीएफ की बैठक में अमेरिका ने प्रस्ताव पेश किया, जिसका ब्रिटेन, फ्रांस और भारत जैसे देशों ने समर्थन किया. पाकिस्तान इससे पहले 2012 से 2015 तक ग्रे लिस्ट में शामिल रह चुका है.

एफएटीएफ के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और बैंकों को पाकिस्तान में कारोबार करने में मुश्किल होगी. वहीं, पाकिस्तानी उद्योगों को भी विदेशों से निवेश जुटाने में समस्या का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, इससे पहले पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसे ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल किए जाने से तीन महीने की मोहलत मिल गई है. लेकिन बुधवार को एफएटीएफ ने उसके इस दावे को खारिज कर दिया था.

इस बीच अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई पर असंतोषजनक बताया है. हालांकि, इस दौरान पाकिस्तान ने जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद के संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है. इसमें उसके संगठनों को प्रतिबंधित सूची में डालने के अलावा उसकी संपत्ति और बैंक खातों को सीज करने जैसे कदम शामिल हैं.