गुजरात की वडगाम विधानसभा सीट से दलित विधायक जिग्नेश मेवानी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया जा सकता है. अब तक ये महज आरोप ही लग रहा था. लेकिन अब इस आरोप में थोड़ी गंभीरता भी नजर आने लगी है. ख़ास तौर पर गुजरात पुलिस के दो अधिकारियों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान के बाद.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गुजरात में पुलिस और मीडिया के सदस्यों का एक व्हाट्स एप ग्रुप बना हुआ है. इसका नाम है, ‘एडीआर पुलिए एंड मीडिया.’ इस ग्रुप पर पिछले दिनों दो वीडियो डाले गए. पहले वीडियाे में पुलिस के जवान एक ऐसे व्यक्ति को पीटते हुए नज़र आ रहे हैं जिसने राजनेताओं जैसे कपड़े पहने हैं. दूसरा वीडियाे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है. इसमें एक साक्षात्कार के दौरान योगी उत्तर प्रदेश में लगातार अपराधियों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराए जाने की घटनाओं पर सवालों के ज़वाब दे रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक ग्रुप में दोनों वीडियो अहमदाबाद ग्रामीण के उप पुलिस अधीक्षक आरपी देवढ़ा ने डाले थे. इसके साथ उन्होंने संदेश भी लिखा, ‘जो लोग पुलिस के बाप बनना चाहते हैं और जो पुलिस को लखोटा (लिफ़ाफा) कहते हैं उन्हें याद रखना चाहिए कि आपके जैसे लोगों के लिए पुलिस ऐसी हो सकती है. हिसाब बराबर कर लिया जाएगा. गुजरात पुलिस.’ बताते हैं कि इस वीडियो को अहमदाबाद ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक ने थम्स अप और इमोज़ी के साथ पसंद किया. इसके बाद मेवानी की ट्विटर पर तीखी प्रतिक्रिया भी आई.

ग़ौरतलब है कि अभी 18 फरवरी को ही एक और वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ था. इसमें मेवानी पुलिस के साथ बहस करते हुए नजर आ रहे हैं. वे दलित कार्यकर्ता भानू वंकर की मौत के विरोध में अहमदाबाद बंद का आयोजन करना चाहते थे. धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम भी था. लेकिन पुलिस ने उन्हें पहले ही ग़िरफ़्तार कर लिया. इसी दौरान हुई बहसबाज़ी में मेवानी पुलिस वालों से कहते सुने गए, ‘तारा बाप नी जागी छे’ (क्या ये तुम्हारे बाप की जगह है). उन्होंने पुलिस वालों के लिए ‘लखोटा’ शब्द का भी इस्तेमाल किया था.