भारत में 4जी सेवा के विस्तार के बावजूद डेटा स्पीड की हालत कमजोर बनी हुई है. मोबाइल एनालिटिक्स कंपनी ओपनसिग्नल ने 4जी की औसत स्पीड के आधार पर 88 देशों की सूची तैयार की है, जिसमें भारत को सबसे नीचे जगह मिली है. भारत की तुलना में पाकिस्तान, सऊदी अरब, थाईलैंड, पेरू और इंडोनेशिया जैसे देशों की स्थिति बेहतर है.

‘द स्टेट ऑफ एलटीई’ (फरवरी 2018) के अनुसार भारत में 4जी की औसत स्पीड 6.07 एबीपीएस (मेगाबाइट प्रति सेकेंड) है जो पिछली रिपोर्ट से भी कम है. नवंबर 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 4जी की औसत स्पीड 6.13 एमबीपीएस थी. हालांकि, भारत में 4जी नेटवर्क की उपलब्धता 86.26 फीसदी है जो स्विटजरलैंड, बेलजियम और सिंगापुर से ज्यादा है. हालिया रिपोर्ट के अनुसार 44.31 एमबीपीएस स्पीड के साथ सिंगापुर पहले स्थान पर है. इसमें यह भी कहा गया है कि अभी तक कोई भी देश 50 एमबीपीएस की स्पीड हासिल नहीं कर पाया है.

ओपनसिग्नल ने अपनी रिपोर्ट पांच हजार करोड़ से ज्यादा नमूनों के आकलन के आधार पर तैयार करने का दावा किया है. इन नमूनों को एक अक्टूबर 2017 से 29 दिसंबर 2017 के बीच जुटाया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक इस सूची में निचले पायदान पर खड़े ज्यादा देशों के 4जी नेटवर्क में थ्रीजी से बेहतर स्पीड देने की क्षमता ही नहीं है.

भारतीय वैज्ञानिकों ने चावल की तीन किस्मों में कैंसर से लड़ने वाले गुणों का पता लगाया

भारतीय वैज्ञानिकों को कैंसर की रोकथाम के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है. वैज्ञानिकों ने चावल की तीन पारंपरिक किस्मों में कैंसर-रोधी गुणों का पता लगाया है. खबरों के मुताबिक चावल की इन किस्मों के नाम गठवन, महाराजी और लाइचा हैं, जो छत्तीसगढ़ के किसानों द्वारा उगाई जाती हैं.

रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग डिपार्टमेंट के प्रमुख वैज्ञानिक दीपक शर्मा ने मीडिया को यह जानकारी दी है. शर्मा ने बताया कि पिछले दिनों आईजीकेवी और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) मुंबई के वैज्ञानिकों द्वारा गठवन, महाराजी और लाइचा प्रजातियों पर संयुक्त शोध किया गया था. इस शोध में पाया गया है कि चावल की इन तीनों प्रजातियों में ऐसे औषधीय गुण हैं, जो कैंसर से लड़ने की क्षमता रखते हैं.

दीपक शर्मा ने आगे बताया, ‘चावल की इन तीनों किस्मों में शरीर की अन्य कोशिकाओं को प्रभावित किए बिना लंग (फेफड़े) और स्तन कैंसर का इलाज करने की क्षमता है. शोध के दौरान लंग कैंसर के मामले में गठवन धान ने 70 प्रतिशत, महाराजी धान ने 70 प्रतिशत और लाइचा धान ने 100 फीसदी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर दिया. जबकि, स्तन कैंसर की कोशिकाओं को गठवन ने 10 प्रतिशत, महाराजी ने 35 प्रतिशत और लाइचा धान ने सर्वाधिक 65 फीसदी तक नष्ट कर दिया.’ (विस्तार से)

दुनिया का पहला एंड्रॉयड संचालित इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च

फ्रांस की तकनीक से जुड़ी कंपनी आर्कोज ने दुनिया का पहला एंड्रॉयड-संचालित इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉंच किया है. सिटी कनेक्ट नाम से उतारे गए इस स्कूटर में एक एंड्रॉयड कंप्यूटर डिस्प्ले दिया गया है जिसमें स्मार्टफोन से जुड़े लगभग सभी फीचर्स हैं. खबरों के अनुसार पांच इंच के इस डिस्प्ले को स्कूटर चलाते समय आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. इस एंड्रॉयड डिस्प्ले को इस तरह से बनाया गया है कि इस पर हलकी-फुलकी दुर्घटना और खराब मौसम का कोई असर नहीं पड़ेगा.

हालांकि, अभी कम्पनी ने एंड्रॉयड डिस्प्ले से जुड़े ज्यादा फीचर्स का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसमें गूगल मैप की उपलब्धता निश्चित बताई जा रही है. 3जी नेटवर्क को सपोर्ट करने वाली इस एंड्रॉयड डिवाइस में एक जीबी रैम, आठ जीबी फ्लैश मेमोरी और क्वाड-कोर प्रोसेसर दिया गया है. साथ ही यह एंड्रॉयड ओरियो ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है. आर्कोज का कहना है कि यूजर इस स्कूटर से संबंधित एप डाउनलोड कर इसके लॉक को कुछ दूरी से भी नियंत्रित कर सकते हैं.

अन्य हार्डवेयर की बात करें तो स्कूटर में 8.5 इंच के दो पहिए दिए गए हैं जो पंचर प्रूफ हैं. इसमें 250 वॉट की एक मोटर है और यह स्कूटर 100 किग्रा तक का वजन सह सकता है. कंपनी का दावा है कि स्कूटर की बैटरी दो से तीन घंटे में फुलचार्ज हो जायेगी और एक बार चार्ज होने पर स्कूटर 25 किमी तक जाने में सक्षम है.

आर्कोज के अनुसार उसने इस स्कूटर को यूरोप की घनी आबादी वाले इलाकों को ध्यान में रखकर बनाया है जिस कारण इसकी अधिकतम गति 25 किमी/घंटा ही रखी गयी है. यूरोप के बाजार में इस इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की कीमत 617 डॉलर यानी करीब 40 हजार रुपए होगी.