भारत के संविधान ने मूल कर्तव्यों और नीति निदेशक तत्वों के मार्फत नागरिकों और राज्य को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि देश में वैज्ञानिक सोच और शिक्षा को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश की जाएगी. लेकिन राजस्थान में शायद इस बात को सिरे से भुला दिया गया है. यहां से हाल के दिनों में ऐसी कई खबरें आई हैं जिनसे लगता है कि सूबे के कर्ता-धर्ता भी नहीं चाहते कि वैज्ञानिक चेतना बढ़े. बल्कि कुछ मामलों में तो वे जहालत की हर हद पार करने पर अामादा दिखाई दिए हैं.

ताजा मामला राजस्थान विधानसभा से जुड़ा है. अफवाह है कि देश की सबसे खूबसूरत सरकारी इमारतों में शुमार इस भवन में किसी भूत-प्रेत का साया है. हालांकि दबी आवाज में इस बात की चर्चा विधायकों के बीच लंबे समय से थी, लेकिन पिछले सप्ताह नाथद्वारा (राजसमंद) के विधायक कल्याण सिंह चौहान के निधन के बाद तो सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विधायकों, सचेतक और एक बड़े मंत्री ने विधानसभा में भूत होने की बात पर मानो मुहर ही लगा दी है.

22 फरवरी को भाजपा के मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर और नागौर से विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी ने सदन के बाहर मीडिया के सामने बयान दिया कि विधानसभा में बुरी आत्माओं का साया है. उनका कहना था, ‘आज तक सदन में 200 विधायक एक साथ कभी नहीं रहे. कभी किसी की मौत हो जाती है, कभी किसी को जेल हो जाती है. आत्माओं की शांति के लिए हवन और पंडितों से भजन करवाने की जरूरत है. इस बारे में मुख्यमंत्री को भी बता चुके हैं. कई सुझाव भी दिए हैं.’

उधर, संसदीय कार्यमंत्री और सूबे के कद्दावर नेता राजेंद्र राठौड़ ने तो सदन में भूत-प्रेत और आत्माओं की संख्या जांचने के लिए बाकायदा कमेटी बनाने की मांग की है. उन्होंने यह सलाह भी दी है कि रात 12 बजे तक सदन की कार्यवाही हर हाल में पूरी हो जानी चाहिए क्योंकि इसके बाद परिसर में भूत-प्रेत सक्रिय हो जाते हैं.

इस दौरान कई विधायक गोपालन राज्य मंत्री ओटाराम देवासी से झाड़-फूंक के लिए कहते दिखे तो वहीं राठौड़ विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल को भूतों के इलाज में पारगंत बता रहे थे. हद तो तब हुई जब बीते शनिवार को कालूराम गुर्जर ने विधानसभा में एक तांत्रिक बुलवा लिया. चार घंटे तक सदन के मुआयने के बाद तांत्रिक ने वहां की भूमि में दोष बताते हुए जल्द ही इसका कोई उपाय करने को कहा है.

उधर, विपक्ष का आरोप है कि भूतों की बात कहकर सरकार सदन के आखिरी सत्र में सवालों से बचना चाह रही है. प्रदेश के कई राजनीतिकार भी इस पूरे मामले को राज्य सरकार का ओछा और शर्मसार करने वाला ऐसा हथकंडा बता रहे हैं जिसके जरिये सत्र के महत्वपूर्ण समय को बरबाद किया जा रहा है.

यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान से इस तरह के मामले सामने आए हैं. अपने नेता और अधिकारियों के इस तरह के दकियानूसी ख्यालों की वजह से प्रदेश इससे पहले भी देश भर में चर्चा का विषय बन चुका है.

1- मुख्यमंत्री आवास से लेकर राजधानी जयपुर का मेयर हाउस तक सब जगह भूत!

राजस्थान के मुख्यमंत्री आवास के वास्तुशास्त्र से जुड़ी गड़बड़ियों की चर्चा सूबे के राजनैतिक गलियारों में हमेशा ही गर्म रहती हैं. शायद इसलिए ही ज़रूरी बैठकों या अन्य सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन तो यहां करवा दिया जाता है, लेकिन खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सीएम हाउस के बजाय किसी और बंगले में रहती हैं. राजधानी जयपुर के मेयर हाउस का भी कुछ-कुछ ऐसा ही हाल है. बताया जाता है कि पूर्व मेयर निर्मला वर्मा का वहां निधन होने के बाद 14 साल से शहर का कोई भी मेयर इस भवन में नहीं रहा है. जयपुर नगर निगम कार्यालय की भी कुछ ऐसी ही कहानी है. इस वजह से यहां कुछ साल पहले जनता के पैसे से मेयर कक्ष के दरवाजे की दिशा बदलवाकर मुख्य द्वार पर गणेश प्रतिमा लगवाई गई थी.

2- मोरनी मोर के आंसू चुगने से गर्भवती होती है!

पिछले साल राजस्थान हाईकोर्ट से रिटायर हुए जज महेश चंद शर्मा ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक चर्चित बयान दिया. मीडिया से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हमनें मोर को राष्ट्रीय पक्षी इसलिए घोषित किया है क्योंकि वह आजीवन ब्रह्मचारी रहता है. मोरनी उसके आंसुओं को चुगकर गर्भवती होती है. मोर कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता.’ अपने बयान में शर्मा ने यह भी जोड़ा, ‘मोर पंख को भगवान कृष्ण ने इसलिए अपने माथे पर लगाया है कि वह ब्रह्मचारी है. साधु-संत भी इसलिए मोर पंख का इस्तेमाल करते हैं. मंदिरों में भी मोर पंख इसलिए ही लगाया जाता है.’ शर्मा यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि गाय के अंदर भी इतने गुण हैं कि उसे राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए. हालांकि शर्मा की गाय वाली बात ने एक नई राजनैतिक बहस को जन्म दिया था. लेकिन मोर-मोरनी वाले बयान के लिए उनका हर तरफ मजाक बनाया गया.

3-गाय ऑक्सीजन छोड़ने वाला एकमात्र जीव!

जस्टिस महेश चंद शर्मा से पहले राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी को भी पिछले साल गाय से जुड़े एक बयान पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. उन्होंने दावा किया था कि गाय एकमात्र ऐसा जीव है जो ऑक्सीजन लेने के साथ ही ऑक्सीजन छोड़ता भी है. विभिन्न पत्रिकाओं में छपने वाले लेखों के हवाले से देवनानी का कहना था कि उनका बयान पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है. ऐसा नहीं है कि माननीय मंत्री जी के पास सिर्फ गायों से ही जुड़ी रोचक जानकारियां मौजूद हों. वे गाहे-बगाहे ऐसे और भी मामलों पर अपनी दिलचस्प राय साझा करते रहते हैं. करीब तीन साल पहले उन्होंने कहा था कि मुस्लिम नमाज पढ़ें या सूर्य नमस्कार करें, एक ही बात है क्योंकि नमाज की कई मुद्राएं सूर्य नमस्कार से मिलती हैं. हाल ही में राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बयान दिया था कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन से हजार साल पहले ही ब्रह्मगुप्त-2 ने दे दिया था.

4-सही है मौताणा!

जहां एक तरफ प्रशासन और सरकारें जनजातियों से जुड़ी कुप्रथाओं को दूर करने की बातें करती हैं, वहीं राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रीय विकास मंत्री नंदलाल मीणा ने उदयुपर, बांसवाड़ा और सिरोही जिलों की आदिवासी कुप्रथा ‘मौताणा’ को पिछले साल वाज़िब करार दे दिया था. इस परंपरा में आदिवासी समुदाय के लोग किसी हादसे अथवा संदिग्ध अवस्था में मौत होने पर शव का अंतिम संस्कार तब तक नहीं करते जब तक कि वे हादसे वाली जगह के मालिक (एक परिवार या पूरे कुटुंब या पूरे समुदाय या फिर पूरे गांव) से मौताणे के रूप में भारी-भरकम मुआवजा नहीं वसूल लेते. इतना ही नहीं मौताणा मिलने तक शव हादसे वाली जगह पर ही रखा रहता है. मीणा का कहना था कि मौताणा आदिवासियों की पुरानी परंपरा है जो सालों से चली आ रही है और चलती रहनी चाहिए. इससे पहले भी मंत्री जी पृथक जनजाति राज्य बनाने के बयान पर खासी आलोचनाएं झेल चुके हैं.

5-गोतस्करों को जान से मार दिया जाएगा!

बीते साल अलवर में कथित गोरक्षकों द्वारा पहले पहलू खां की हत्या और फिर एक गो-तस्कर की पिटाई का वीडियो सामने आने पर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने भी विवादास्पद बयान दिया था. उनका कहना था कि जो कोई गो-वध या गो-तस्करी में शामिल होगा उसे इसी तरह से मार दिया जाएगा. उन्हीं के शब्दों में ‘गो-तस्करी, गोकशी करोगे तो यूं ही पिट-पिट कर मरोगे.’

आहूजा प्रदेश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल एक प्रमुख नाम हैं जो आए दिन अपने विवादित बयानों के लिए राष्ट्रीय सुर्खियों में बने रहते हैं. दो साल पहले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़े एक बयान पर भी उनकी जमकर आलोचना हुई थी. अलवर में एक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा था, ‘जेएनयू में रोजाना 3000 बीयर की बोतलें, 2000 शराब की बोतलें, 10 हजार सिगरेट के टुकड़े, चार हजार बीड़ी, 50 हजार हड्डियों के टुकड़े, दो हजार चिप्स के पैकेट, तीन हजार उपयोग किए गए कंडोम और 500 गर्भपात के इंजेक्शन मिलते हैं. जेएनयू में रोज रात आठ बजे बाद होने वाले कार्यक्रमों में छात्र न्यूड डांस करते हैं.’

6-हिंदू ज्यादा बच्चे पैदा करें!

भाजपा नेताओं को विवादित बयानों से बचने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश को अलवर के विधायक बनवारी लाल सिंघल ने इस साल की शुरुआत में ही किनारे कर दिया. उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘हिंदू को एक और दो बच्चे पैदा कर उनकी पढ़ाई की चिंता है, लेकिन मुसलमानों को इस बात की चिंता है कि देश पर राज कैसे किया जाता है. शिक्षा और विकास उनके लिए मायने नहीं रखता है इसलिए वे ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं.’ इससे पहले वे फेसबुक के जरिए भी अपने विचार व्यक्त कर चुके थे. उन्होंने लिखा था कि बहुसंख्यक होने पर मुसलमानों की राजनीति चलेगी और वे हिंदुओं को निचले स्तर के नागरिक की तरह जीने पर मजबूर करेंगे.

बहरहाल ऐसे कई मामले और भी हैं जब राजस्थान में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने खास उद्देश्यों या निजी समझ की वजह से समय-समय पर ऐसे कई मौके पैदा किए जब देशभर के सामने प्रदेश को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत में सिर्फ राजस्थान में ही संविधान या उसकी वैज्ञानिक सोच का मखौल बनाया जाता है या सिर्फ यही प्रदेश रूढ़ियों और अंधविश्वासों के साये से घिरा हुआ है. देश के अन्य हिस्सों से भी इस तरह की खबरें सामने आती रहती हैं. हमने रिपोर्ट की शुरुआत भूतों से की थी. हाल ही में लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया था कि वे अपने सरकारी आवास को इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वहां भूत भेज दिए हैं.