पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली ने कहा है कि भारतीय टीम का कोच बनाने के लिए ग्रेग चैपल को टीम में लाना उनके करियर की सबसे बड़ी गलती थी. सौरव गांगुली ने अपनी किताब ‘अ सेंचुरी इज नॉट इनफ’ यह बात कही है. किताब में सौरव गांगुली ने इस बात का भी जिक्र किया है कि 2007 के विश्व कप में मिली शर्मनाक हार के बाद से उन्होंने ग्रेग चैपल से बात नहीं की है.

कप्तानी छीनना अस्वीकार्य और अक्षम्य था

ग्रेग चैपल के कोच बनने के बाद उनके और सौरव गांगुली के बीच तनाव की खबरें आती रहती थीं. सितंबर 2005 में खबर आई थी कि चैपल और चुनाव समिति ने सौरव गांगुली से भारतीय टीम की कप्तानी छीन ली और उन्हें टीम से भी बाहर कर दिया. इस किस्से को याद करते हुए गांगुली ने उन्हें कप्तानी से हटाए जाने के फैसले को असंभव, अस्वीकार्य और अक्षम्य बताया है. उन्होंने लिखा है, ‘मैं महाराज से अचानक पीड़ित बन गया.’

सौरव गांगुली लिखते हैं कि उस समय की टीम के कई खिलाड़ी बतौर कोच चैपल की प्रशंसा नहीं करेंगे. उनका दावा है कि भविष्य में और किताबें आएंगी जिनमें चैपल के बारे में वही राय होगी जो उन्होंने दी है. गांगुली कहते हैं, ‘मेरे साथ जो हुआ वह किसी के साथ नहीं होना चाहिए. हां, आपको ड्रॉप किया जाता है, लेकिन ऐसा व्यक्तिगत नहीं होना चाहिए. हरेक खिलाड़ी को उसके प्रदर्शन से आंका जाना चाहिए.’

अपनी किताब में सौरव गांगुली ने युवा क्रिकेटरों को निराशाओं से उबरने की सलाह भी दी है. उन्होंने लिखा है, ‘कप्तानी छिनना एक आकस्मिक घटना थी. आप दुखी होते हैं लेकिन उसे दिखा नहीं सकते, क्योंकि आपको उसे पीछे छोड़ वापसी करनी होती है. सीखने के लिहाज से वह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण अनुभव रहा क्योंकि उसके बाद करीब एक दशक से मैंने बेहतर ही किया है. इसने मुझे जुझारू बनाया है.’