जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के लापता छात्र नजीब अहमद को ग़ायब हुए एक साल से ज़्यादा समय बीत चुका है. पुलिस उसे अब तक नहीं ढूंढ नहीं पाई है और इसे लेकर कोर्ट से फटकार भी खा चुकी है. नजीब की मां फ़ातिमा नफ़ीस अपने बेटे की खोज में दर-दर भटक रही हैं और थोड़े-थोड़े समय में उनसे जुड़ी ख़बरें आती रहती हैं. सोमवार को ही वे सीबीआई दफ़्तर के सामने जेएनयू छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुईं. ये लोग नजीब को वापस लाने की मांग करने के लिए इकट्ठा हुए थे.

इस बीच वॉट्सएप पर एक ख़बर की तस्वीर वायरल हो रही है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक ख़बर के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नजीब कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस यानी आईएस में शामिल हो गया है. नीचे यह तस्वीर देखी जा सकती है.

इस दावे के फेर में एक ख़ास वर्ग के लोगों के साथ भाजपा नेता राम माधव भी आ गए. उन्होंने ट्वीट के ज़रिए इस ख़बर को शेयर कर दिया. हालांकि बाद में इस पर उन्हें माफ़ी मांगनी पड़ी. ऐसा इसलिए क्योंकि यह ख़बर जेएनयू के छात्र नजीब अहमद से नहीं बल्कि केरल के एक दूसरे छात्र नजीब से जुड़ी थी.

अब इस मामले की सच्चाई और गफलत को समझते हैं. बीते साल 21 सितंबर को मीडिया में ख़बर आई थी कि केरल के रहने वाले और तमिलनाडु स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एमटेक छात्र नजीब ने संभवतः आईएसआईएस जॉइन कर लिया है. छात्र की उम्र 23 साल बताई गई थी. रिपोर्टों के मुताबिक़ नजीब 15 अगस्त, 2017 से ग़ायब था. ख़बरों की मानें तो बाद में उसने ख़ुद अपनी मां को बताया कि वह अपनी मंज़िल (आईएस) पर पहुंच गया है. उसने अपनी मां और परिवार से यह भी कहा कि उन्हें उससे संपर्क करने या उसे खोजने के लिए पुलिस के पास जाने की ज़रूरत नहीं है. जांच में पता चला कि केरल का नजीब हैदराबाद से दुबई चला गया था. वहां से फिर वह ईरान पहुंचा.

दूसरी तरफ़, जेएनयू के नजीब अहमद की कहानी इससे बिलकुल अलग है. ख़बरों के मुताबिक़ 15 अक्टूबर, 2016 को नजीब अहमद जेएनयू छात्रावास से ग़ायब हो गया था. बताया जाता है कि इससे पहले उसका एबीवीपी के कुछ छात्रों से झगड़ा हुआ था. तब से अब तक नजीब का कुछ पता नहीं चला है.

नजीब के ग़ायब होने के एक महीने बाद उसके अलीगढ़ में दिखने की ख़बर आई थी. एक महिला ने चिट्ठी लिखकर नजीब की मां को बताया था कि उसने नजीब अहमद को अलीगढ़ के मार्केट में देखा है. चिट्ठी में महिला ने कहा कि नजीब ने उससे मदद मांगी. उसने बताया कि उसे अलीगढ़ में बंद कर के रखा गया है, लेकिन वह किसी तरह भाग निकला. चिट्ठी के मुताबिक़ महिला जब तक इसकी जानकारी और किसी को देती नजीब वहां से जा चुका था, या शायद उसे कोई वहां से ले गया था.

इसके चार महीने बाद 21 मार्च, 2017 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक सनसनीख़ेज़ ख़बर छपी थी. सूत्रों के हवाले से अख़बार ने दावा किया कि नजीब अहमद आईएस के संपर्क में था और उससे संबंधित यूट्यूब वीडियो और गूगल कॉन्टेंट देखता था. बाद में पुलिस ने इस रिपोर्ट का खंडन किया. उसने साफ़ कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि नजीब के पास आईएस के वीडियो और अन्य सामग्री थी. यह ख़बर ग़लत थी और इसको लेकर अख़बार की ख़ासी आलोचना की गई.

ये दोनों मामले अलग-अलग हैं. लेकिन इनके कुछ तथ्य मिलते-जुलते हैं. जैसे दोनों छात्रों का नाम नजीब है और उनसे जुड़ी ख़बरों में मां का होना उन्हें एक जैसा बनाता है. फ़र्ज़ी ख़बरों के खिलाड़ी जानते हैं कि लोगों को बहकाने के लिए इतना काफ़ी है. राम माधव व अन्य लोग अगर नजीब अहमद और केरल के नजीब के चेहरों पर भी ग़ौर कर लेते तो वे इस ग़लत जानकारी को शेयर नहीं करते.

जेएनयू का छात्र नजीब अहमद (बाएं) और वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का छात्र नजीब (दाएं)
जेएनयू का छात्र नजीब अहमद (बाएं) और वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का छात्र नजीब (दाएं)