त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से राज्य में कई जगहों से हिंसा की खबरें आ रही हैं. वहीं सोमवार को दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया में रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को गिरा दिया गया है. सोशल मीडिया पर कल शाम से ही यह वीडियो शेयर किया जा रहा है. इसमें दिख रही भीड़ में कई लोग भाजपा सदस्यों द्वारा पहनी जाने वाली टोपी लगाए हुए हैं और इस आधार पर माना जा रहा है कि इस घटना के पीछे पार्टी समर्थकों का हाथ है. यही वजह है कि सोशल मीडिया में इस खबर पर भाजपा समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी नोकझोंक चल रही है. हालांकि यहां एक बड़े तबके ने इस घटना की आलोचना की है. अमित भंडारी का ऐसा ही एक ट्वीट है, ‘...बात लेनिन की नहीं है, असल मुद्दा है हिंसा और असहिष्णु मानसिकता का... यह चिंताजनक है...’

इस घटना के हवाले से सोशल मीडिया में वामपंथी पार्टियों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. ट्विटर हैंडल ‏ @GappistanRadio पर पूछा गया है, ‘मुझे लगता था कि कम्युनिस्ट मूर्तियों पर पैसा बर्बाद करने के विरोधी होते हैं, फिर लेनिन की मूर्ति कहां से आई?’ इसके साथ ही यहां शहीदे आज़म भगत सिंह का भी कई लोगों ने जिक्र किया है. भगत सिंह लेनिन का बेहद सम्मान करते थे. बताया जाता है कि वे फांसी लगने के कुछ घंटे पहले तक लेनिन की किताब ‘स्टेट एंड रिवॉल्यूशन’ पढ़ रहे थे. सोशल मीडिया पर इन प्रसंगों की चर्चा करते हुए कई लोगों ने भाजपा को घेरा है. ट्विटर पर पंकज जोशी ने सवाल उठाया है, ‘रूसी क्रांति के जनक जिस लेनिन को शहीदे आज़म भगत सिंह अपना आदर्श मानते थे, त्रिपुरा में उस लेनिन की मूर्ति गिराकर भाजपा कौन सा राष्ट्रवाद साबित कर रही है!’

सोशल मीडिया में इस घटना पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

कुणाल सिंह | @d_extrovert

लेनिन को धराशायी होना चाहिए. लेकिन अगर उन्हें लेनिनवादी तरीकों से ही धराशायी किया जाएगा तब तो यह लेनिन की जीत हुई. क्या ऐसा नहीं है?

पिक्चर इंडिया | @PictureIndia

1978 में तत्कालीन विदेशमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मॉस्को के रेड स्क्वॉयर पर लेनिन को श्रद्धांजलि देते हुए.

पन्सटर | @Pun_Starr

एक बार लेनिन जनता की स्मृति से गायब हुए तो फिर आपको यह बताने के लिए इतिहास की किताबें दोबारा लिखी जाएंगी कि भगत सिंह फांसी लगने के पहले एग्जाम वॉरियर्स (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखी गई किताब) पढ़ रहे थे.

सुयश सुप्रभ | facebook/suyash.suprabh

वे जिसे नहीं समझते उसे तोड़ने लगते हैं. जैसे प्रेम, विज्ञान, लेनिन की मूर्ति आदि.

अभिषेक श्रीवास्तव | facebook/abhishekgroo

लेनिन की मूर्ति टूटी, अच्छा हुआ. मूर्तियां टूटनी ही चाहिए, चाहे किसी की हों. मानवीय मूल्यों और आदर्शों के प्रणेताओं की मूर्ति बनाना सबसे बड़ा अपराध है. मूर्तियां आदर्शों को निगल जाती हैं… बुद्ध से लेकर कबीर, मार्क्स, लेनिन, गांधी, फुले, पेरियार, ओशो और अंबेडकर सबकी प्रतिमाएं बनाकर हम सबके आदर्शों को घोल कर पी गए. अब मूर्ति टूटी है तो दर्द हो रिया है!...

अनिरुद्ध गर्ग | @Ani_Bjp

चलो त्रिपुरा चलें दिखाने, जलवा हिंदू पावर का. जीन्स पहन लो डेनिम का, नाम मिटा दो लेनिन का.