भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी काफ़ी समय से बिना अनुबंध के खेल रहे हैं क्योंकि उनके अनुबंध का इंतज़ाम हो नहीं पा रहा था. जैसे-तैसे यह इंतज़ाम हुआ और बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने बुधवार को खिलाड़ियों के विभिन्न ग्रेड के अनुसार उनके अनुबंधों का ऐलान किया. लेकिन इसके तुरंत बाद ही इस पर विवाद शुरू हो गया है जो बीसीसीआई पदाधिकारियों और बोर्ड की प्रशासकीय समिति (सीओए) के बीच है.

द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक बीसीसीआई पदाधिकारियों ने खिलाड़ियों के नए अनुबंधों को ‘अवैधानिक’ बताया है. साथ ही कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त सीओए को अनुबंध की यह व्यवस्था करने का कोई अधिकार नहीं है. इस तरह के फ़ैसलों पर पहले बीसीसीआई की सामान्य सभा से मंज़ूरी लेनी पड़ती है. बोर्ड के पदाधिकारियों ने यह भी कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर करेंगे और इसमें खिलाड़ियों के अनुबंधों की प्रकृति पर सवाल उठाएंगे.

उधर सीओए की ओर से कहा गया है कि खिलाड़ियाें की नई अनुबंध व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले बोर्ड पदाधिकारियों का चुनाव दो मार्च 2015 को तीन साल के लिए हुआ था. सीओए के मुताबिक उनका कार्यकाल ख़त्म हो चुका है इसलिए उन्हें सीओए के फ़ैसले पर सवाल उठाने या उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर करने का कोई अधिकार नहीं है.

सीओए के प्रमुख और देश के पूर्व नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय ने भी अपनी तरफ़ से मामला स्पष्ट करने की कोशिश की है. उनका कहना है, ‘खिलाड़ी काफ़ी समय से बिना अनुबंध के ही खेल रहे हैं. यह सब और नहीं चल सकता. जहां तक खिलाड़ियों की नई अनुबंध व्यवस्था का ताल्लुक़ है तो इस बारे में बीते एक अक्टूबर को सीओए ने बोर्ड की आम सभा और वित्तीय समिति को इसका पूरा विवरण दे दिया था.’

बीसीसीआई ने नई घोषित अनुबंध व्यवस्था के तहत क्रिकेट खिलाड़ियों को चार श्रेणियों (ए-प्लस, ए, बी और सी) में बांटा है. इनमें ‘ए-प्लस’ श्रेणी नई बनाई गई है. इसमें भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली सहित कुल पांच खिलाड़ी शामिल किए गए हैं.