सोमवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल भाजपा में शामिल हो गए. नरेश अग्रवाल का कहना है कि वे सपा द्वारा उनका राज्यसभा टिकट जया बच्चन को दिए जाने के फैसले से आहत होकर सपा से नाता तोड़ रहे हैं. हालांकि, भाजपा में शामिल होते समय उन्होंने एक विवादित बयान दे दिया जिस पर कुछ भाजपा नेताओं ने भी आपत्ति जताई है. सपा नेता जया बच्चन को राज्यभा टिकट मिलने पर नाराजगी जताते हुए अग्रवाल ने कहा कि उनकी तुलना फिल्मों में नाचने वालों के साथ की गई.

इस बार राज्यसभा के टिकट को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव काफी मुश्किल में थे. सुनी-सुनाई है कि चाचा और अखिलेश के सबसे भरोसेमंद सलाहकार रामगोपाल यादव सपा के कोटे का एकमात्र राज्यसभा टिकट नरेश अग्रवाल या किसी पिछड़े नेता को दिलवाना चाहते थे. उधर, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव एक बार फिर जया बच्चन को राज्यसभा भेजने का समर्थन कर रही थीं. दूसरी तरफ, अखिलेश की सौतेली मां अपने बेटे प्रतीक यादव या बहू अपर्णा यादव को दिल्ली भेजना चाहती थीं.

पहले अखिलेश यादव के पास पांच नेताओं को राज्यसभा भेजने की ताकत थी. तब सूबे में उनकी सरकार थी. लेकिन इस बार पासा पलटा हुआ है. वे सिर्फ एक ही नेता को राज्यसभा में भेज सकते हैं. इसलिए उन्होंने बड़े हिसाब-किताब के बाद जया बच्चन को दिल्ली भेजने का फैसला किया. लखनऊ से लेकर मुंबई और दिल्ली से लेकर कोलकाता तक कई नेता जानना चाहते हैं कि आखिरकार अखिलेश ने ऐसा क्यों किया? लखनऊ और दिल्ली की बात तो समझ में आती है, लेकिन आप सोच रहे होंगे कि यह बात मुंबई और कोलकाता तक कैसे पहुंच गई.

सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि जया बच्चन की सियासत में जबरदस्त दिलचस्पी है. अगर अखिलेश जया को अपनी पार्टी से राज्यसभा नहीं भेजते तो ममता बनर्जी उन्हें तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा का टिकट दे सकती थीं. जया मूलत: बंगाली ही हैं और बांग्ला भी जबरदस्त बोलती हैं. ऐसे में ममता बनर्जी को अपनी पार्टी के लिए एक ऐसा स्टार प्रचारक मिल जाता जिसकी पश्चिम बंगाल से बाहर पहचान है. पहले ममता के पास मिथुन चक्रवर्ती थे, लेकिन अब वे सांसदी छोड़ चुके हैं और दीदी से भी उनकी दोस्ती नहीं रही है.

समाजवादी पार्टी के नेताओं की बात पर यकीन करें तो ममता बनर्जी की अखिलेश यादव से इस बाबत बात भी हुई थी. अब अखिलेश को फैसला करना था कि वे जया जैसे चेहरे को आसानी से जाने देंगे या फिर उन्हें अपनी पार्टी में रखते हुए राज्यसभा का टिकट देंगे. लखनऊ में अखिलेश यादव के करीबी नेता बताते हैं कि चुनाव के वक्त उनकी पार्टी में सिर्फ तीन ही नेताओं की जबरदस्त मांग होती है - पहले खुद अखिलेश यादव, दूसरी डिंपल यादव और तीसरी जया बच्चन. इसलिए दल के कई बड़े नेताओं का नाम काटकर उन्होंने जया बच्चन को राज्यसभा भेजा है. अंत में अखिलेश ने वही किया जो उनकी पत्नी डिंपल करने को कह रहीं थीं.

सुनी-सुनाई यह भी है कि जया बच्चन को एक बार फिर राज्यसभा भेजने की दो और वजहें भी हैं. जब समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह थे तो उस वक्त जया बच्चन को अमर सिंह पार्टी में लाए थे. उस वक्त जयाप्रदा भी समाजवादी पार्टी में थीं. जयाप्रदा ने रामपुर से लोकसभा का चुनाव जीता और लोकसभा सदस्य बनीं. उधर, जया बच्चन को राज्यसभा भेजा गया. जब अमर सिंह समाजवादी पार्टी से निकाले गए तब जया प्रदा तो अमर सिंह के साथ चली गईं लेकिन जया बच्चन ने पार्टी नहीं छोड़ी. अखिलेश आज तक इस बात को नहीं भूले कि जया बच्चन ने उनके ‘अंकल’ की लाख जिद के बाद भी पार्टी का साथ दिया.

मुंबई में अमर सिंह के करीबी लोग भी बताते हैं कि वे आज तक इस बात को पचा नहीं पाए कि जया बच्चन ने पार्टी को चुना और उनको छोड़ दिया. अमर सिंह और अमिताभ बच्चन के बीच आई खटास की कई वजहों में से एक यह भी रही. अमर सिंह को जब पता चला कि इस बार समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को टिकट दिया है तो वे इस पर भी चुटकी लेने से नहीं चूके. खबरों के मुताबिक उन्होंने संसद में कुछ पत्रकारों से जो कहा उसका लब्बोलुआब यह है कि जया बच्चन नरेश अग्रवाल जैसे खांटी राजनेता से भी ज्यादा होशियार निकलीं. जब अमर पार्टी से बाहर हुए तो वे मुलायम की पार्टी में रहीं. जब अखिलेश खुद पार्टी के अध्यक्ष बन गए तो वे अखिलेश के साथ हैं.

इस फैसले की एक और वजह है जो बहुत कम लोग पढ़ पाए. सालों बाद ऐसा मौका आया है जब समाजवादी पार्टी के पास इतने विधायक नहीं कि वह अपने बड़े नेताओं को एडजस्ट कर सके. ऐसे में अखिलेश अगर नरेश अग्रवाल या किसी भी दूसरे नेता को राज्यसभा भेजते तो कोई तीसरा नेता नाराज़ हो जाता. अगर यादव नेता को भेजते तो दूसरी जाति का नेता खफा हो जाता. इसलिए अखिलेश ने एक सेफ और न्यूट्रल व्यक्ति को भेजने का फैसला किया. जब कुछ पत्रकारों ने अखिलेश से जया के चुनाव के बारे में पूछा तो अखिलेश ने यही तर्क दिया कि अब तो 2019 से डिंपल भी संसद में नहीं होंगी सो उन्हें एक मजबूत महिला की आवाज़ दिल्ली तक पहुंचानी है. उनका कहना था कि जया उत्तर प्रदेश की बेटी न सही, उत्तर प्रदेश की बहू तो हैं.