प्रसिद्ध आर्किटेक्ट बालकृष्ण दोशी को प्रतिष्ठित प्रित्जकर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले वे पहले भारतीय भी हैं. उन्हें यह पुरस्कार मई के महीने में टोरंटो में दिया जाएगा. प्रित्जकर पुरस्कार आर्किटेक्चर के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वालों को दिया जाता है. इसे आर्किटेक्चर का नोबेल भी कहा जाता है. इससे पहले जाहा हदिद, फ्रेंक गेहरी, आईएम पेई और शिगेरु बान जैसे विश्व प्रसिद्ध आर्किटेक्ट भी इस पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं.

इस पुरस्कार के लिए बीके दोशी के नाम की घोषणा बुधवार को संस्थान के अध्यक्ष टॉम प्रित्जकर ने की. उन्होंने कहा, ‘बालकृष्ण दोशी कई साल से ऐसा आर्किटेक्चर तैयार कर रहे हैं जिसमें गंभीरता झलकती है. उनका डिजाइन गैर आकर्षक लग सकता है लेकिन वे ट्रेंड की बजाय जरूरत को महत्व देते हैं. उन्होंने जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ देश के लोगों के लिए गुणवत्ता भरा समसामयिक आर्किटेक्चर मुहैया कराने की दिशाा में काम किया है.’

प्रित्जकर पुरस्कार मिलने की घोषणा पर 90 वर्षीय बीके दोशी ने खुशी जताई है. उन्होंने कहा, इस पुरस्कार का श्रेय मैं अपने गुरु ली कॉर्बूजियर को देता हूं. उन्हीं से मिली शिक्षा का नतीजा है कि क्षेत्रीय जरूरतों को समझते हुए आधुनिकता के मेल के साथ लंबे समय तक उपयोगी रहने वाली इमारतों को तैयार करने में मुझे सफलता मिली.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने हमेशा अपने डिजाइन में जगह और रोशनी को सबसे ज्यादा अहमियत दी.’

बालकृष्ण दोशी ने मुंबई के जेजे स्कूल आॅफ आर्किटेक्चर से पढ़ाई की. इसके बाद वे पेरिस में प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ली कॉर्बूजियर के साथ जुड़ गए. साल 1950 में भारत लौटने से पहले उन्होंंने वहां कई अहम परियोजनाओं पर काम किया. स्वदेश आकर उन्होंने अपनी संस्था ‘वास्तुशिल्प’ की नींव रखी. इसके बाद 1955 में लूइस कहन और अनंत राजे के साथ उन्होंने अहमदाबाद स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट का डिजाइन किया.

उनके द्वारा डिजाइन शैक्षणिक संस्थानों में कई और बड़े नाम शामिल हैं. इनमें बेंगलुरु और लखनऊ के इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट, नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ फैशन टेक्नोलॉजी, टैगोर मेमोरियल हॉल, इंस्टीट्यूट आॅफ इन्डोलॉजी प्रमुख हैं. उन्होंने कम लागत में तैयार होने वाली कई आवासीय परियोजनाओं को भी डिजाइन किया है. जिसमें इंदौर की अरण्य परियोजना प्रमुख है.