सुप्रीम कोर्ट ने जनमत सर्वेक्षणों पर रोक लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने पूछा, ‘यह कैसी जनहित याचिका है? एक्जिट पोल्स, ओपीनियन पोल्स से हम कैसे जुड़े हैं? हम इसमें दखल नहीं देंगे.’ ओपीनियन पोल्स को चुनाव से पहले, जबकि एक्जिट पोल्स को चुनाव के बाद किया जाता है. इनका मतगणना से पहले चुनाव परिणामों का पूर्वानुमान करने में इस्तेमाल किया जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने लगाई थी. इसमें कहा गया था कि ऐसे चुनाव सर्वेक्षणों से जनता तक गलत और भ्रामक पूर्वानुमान पहुंचता है, जिससे मतदाताओं का व्यवहार प्रभावित होता है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के खिलाफ है. याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 की धारा-126 मतदान के समय से 48 घंटे पहले से ही चुनाव सामग्री के प्रकाशन और वितरण पर रोक लगा देती है, लेकिन यह भी जनमत सर्वेक्षणों के प्रकाशन या प्रसारण पर मौन है. हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को इसमें दखल देने लायक नहीं माना.

बीते साल चुनाव आयोग ने इस दिशा में कदम उठाया था. आयोग ने हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के एक्जिट पोल्स के नतीजों को दिसंबर में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने तक प्रसारित या प्रकाशित करने पर रोक लगा दी थी.