भारत के लिए इन दिनों भूटान एक अहम देश बना हुआ है. छोटा होने के बावज़ूद यह देश भारत के लिए सामरिक और राजनयिक रूप से काफ़ी मायने रखता है. और आने वाले दिनों में भारत और भूटान में होने वाले तमाम कार्यक्रमों के जरिए इस अहमियत को भारतीय पक्ष और पुख़्ता करने की कोशिश में है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक भारत और भूटान के राजनयिक संबंधों को 50 साल पूरे हो रहे हैं. इस मौके पर दोनों देशों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा का कार्यक्रम भी शामिल है. सूत्र बताते हैं कि भूटान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को वहां की यात्रा का न्यौता मिला है. इसे उनके कार्यालय ने स्वीकार कर लिया है. उनकी यात्रा की तारीखें अभी तय की जानी हैं.

इसके अलावा भारत भी इसी साल भूटान के ‘जे खेंपो’ की अगवानी-मेज़बानी भी करेगा. जे खेंपो भूटान के राजगुरु का पद है. उनकी नियुक्ति भूटान के राजा करते है. फिलहाल इस पद को ट्रुल्कू जिग्मे चोएद्रा संभाल रहे हैं. भूटान-भारत दोस्ती का एक स्मारक स्तूप बनाने की भी योजना है. हालांकि यह साफ़ नहीं है कि यह स्तूप कहां बनेगा. भूटान में भारत इसी साल कुछ नई परियोजनाएं भी शुरू कर सकता है.

सूत्रों की मानें तो भूटान को लेकर भारत की सरगर्मी के पीछे इस इलाके में चीन की सक्रियता, बढ़ता प्रभाव और लगातार उसकी बढ़ती दख़लंदाजी है. ग़ौरतलब है कि पिछले साल भारत और चीन की सीमाएं 73 दिन तक आमने-सामने युद्ध की स्थिति में खड़ी रही थीं. क्योंकि चीन ने भूटान के अधिकार क्षेत्र वाले डोकलाम पठार पर कब्जे की कोशिश की थी. और चूंकि भूटान को भारत की ओर से सामरिक सुरक्षा मिली हुई है. साथ ही डोकलाम भारत के लिए भी सामरिक महत्व की जगह है इसलिए भारत को इस विवाद में कूदना पड़ा था.