धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम युवक से शादी करने वाली केरल की हादिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आजादी देने वाला बताया है. गुरुवार को शीर्ष अदालत ने हादिया की शादी को अवैध ठहराने वाले केरल हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया था और उसे अपने पति के साथ रहने की इजाजत दे दी थी. खबरों के मुताबिक शनिवार को अपने पति से मिलने कोझिकोड पहुंची हादिया ने कहा, ‘संविधान हमें अपना धर्म चुनने की आजादी देता है, जो सभी नागरिकों का बुनियादी अधिकार है. यह सारा विवाद इसलिए हुआ, क्योंकि मैंने इस्लाम अपना लिया था.’

हादिया अभी तमिलनाडु के सलेम स्थित मेडिकल कॉलेज में रहकर पढ़ाई कर रही है. उसने जनवरी 2016 में इस्लाम अपनाने के बाद मुस्लिम युवक शफीन जहां से शादी कर ली थी. हालांकि, जबरन धर्मांतरण का आरोप लगने की वजह से उनकी शादी विवादों में आ गई थी. हादिया के पिता केएम अशोकन की याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट ने हादिया और शफीन जहां की शादी को खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने अपनी मर्जी से शादी करने की हादिया की गवाही को नहीं माना था.

केरल हाई कोर्ट के इस फैसले के हादिया के पति शफीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शादी में बालिग लड़की की रजामंदी को सबसे अहम बताया था. इसके बाद शीर्ष अदालत में पेश हादिया ने कहा था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और अपने पति के साथ रहना चाहती है. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट का फैसला पलट दिया. हालांकि, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इस मामले के आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से जुड़ाव के आरोपों की जांच जारी रखने के लिए स्वतंत्र है.