इस किताब के अध्याय ‘वे हैं इसलिए आप हैं...कृतज्ञ रहें’ का एक अंश : ‘आपकी सफलता केवल आपकी नहीं होती. हर सफलता के पीछे जाने-अंजाने अनगिनत लोगों का योगदान होता है... अपने विद्यालय के उन कर्म-योगियों के बारे में सोचिए जो विद्यालय को साफ-सुथरा रखते हैं, बगीचे की देखभाल करते हैं या फिर उस दर्जी के बारे में सोचिए, जिसने आपकी पोशाक तैयार की, जिस पुस्तक विक्रेता से आपने अपनी किताब, कॉपियां खरीदीं.

उस बस डाइवर और कंडक्टर को याद कीजिए जो सालभर आपको सुरक्षित विद्यालय लाते-ले जाते रहे. अगर आप हॉस्टल में रहे हैं तो खाना बनाने वाला रसोइया आपको जरूर याद आता होगा. आप जहां हैं, वहां इन सभी के सहयोग और आशीर्वाद के बिना नहीं पहुंच सकते थे.

उन अनगिनत लोगों के बारे में भी सोचिए जिनसे आप कभी नहीं मिले और शायद कभी मिलेंगे भी नहीं. लेकिन उनका आपके जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है. वह किसान, जिसने पसीना बहाकर आपके लिए अन्न उपजाया. वह श्रमिक जिसने तपती धूप और कड़ाके की ठंड में भी एक-एक ईंट जोड़कर आपके पढ़ने के लिए विद्यालय की इमारत खड़ी की.

ये गुमनाम नायक ही भारत के सच्चे निर्माता हैं और हमें हमेशा इनके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए.’


किताब : एग्जाम वॉरियर्स
लेखक : नरेंद्र मोदी
प्रकाशक : पेंगुइन रैंडम हाउस
कीमत : 100 रुपये


राजनीति से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ी मुश्किल यह है कि उनकी गैर-राजनीतिक मकसद से कही गई हर बात को भी राजनीति के चश्मे से ही देखा जाता है. ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक पर यह बात लागू होती है. ऐसे में इन लोगों के लिए अपनी गैर-राजनीतिक बात कहना और लोगों तक उसे उसी रूप में पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होती है. संभवतः इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यह किताब छोटे बच्चों को संबोधित करके लिखी है. क्योंकि सिर्फ वे ही हैं जो उनकी किसी बात को बगैर किसी राजनीतिक चश्मे के देखने, सुनने और गुनने की कोशिश कर सकते हैं. वहीं ‘एग्जाम वॉरियर्स’ छात्र-छात्राओं को न सिर्फ स्कूल की परीक्षाओं, बल्कि जीवन की परीक्षा के लिए भी कुछ बेहद कारगर और प्रभावी गुरुमंत्र देती है.

ऐसे समय में जब पूरे समाज में एग्जाम फोबिया तेजी से बढ़ता ही जा रहा है, नरेंद्र मोदी परीक्षा की तुलना बड़े ही सकारात्मक तरीके से उत्सव से करते हैं. वे बच्चों से परीक्षाओं का स्वागत त्यौहारों की तरह ही करने की बात कहते हैं. परीक्षा के पर्व की उत्साह और आनंद से तैयारी करने की सलाह देते हुए नरेंद्र मोदी लिखते हैं -

‘सालभर हम त्यौहारों की प्रतीक्षा करते हैं. ठीक इसी तरह हम सालभर परीक्षा का इंतजार करते हैं...त्यौहारों के समय व्यक्ति के अंदर जो कुछ सर्वश्रेष्ठ है, वह बाहर आता है. व्यक्ति और समाज की अच्छाइयों के दर्शन होते हैं. परीक्षाएं भी इसीलिए होती हैं कि हमारे अंदर का सर्वश्रेष्ठ बाहर आए, हमें हमारी क्षमताओं का अहसास हो...ऐसा माना जाता है कि सामान्य दिनों की अपेक्षा उत्सव काल में की गई साधना, व्रत, प्रार्थनाएं ज्यादा फलदायी होती हैं. इसी तरह परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान की गई पढ़ाई अधिक प्रभावी होती है.’

यह किताब बार-बार बहुत संक्षेप में, लेकिन प्रभावी तरीके से यह समझाने की कोशिश करती है कि स्कूल, कॉलेज या कोई भी परीक्षा आपके पूरे जीवन की परीक्षा नहीं होती. न ही एक परीक्षा में फेल होने से किसी के पूरे व्यक्तित्व और हुनर का मूल्यांकन हो सकता है. नरेंद्र मोदी बहुत कम शब्दों में यह बताने में सफल होते हैं कि जीवन अनंत संभावनाओं से भरा है, बस हमें उन संभावनाओं को बिना थके टटोलने का साहस रखना चाहिए. परीक्षा को सहजता से लेने की सीख देते हुए वे एक जगह लिखते हैं -

‘परीक्षा जीवन-मरण का प्रश्न नहीं है. अपनी योग्यता को कभी भी किसी बोझ तले दबने ना दें, विशेष रूप से परीक्षा में असफलता के डर से...डॉ कलाम फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन वे अपने उस सपने को पूरा नहीं कर पाए. अगर उन्होंने उसी एक विफलता से हार मान ली होती तो क्या वे इतने महान वैज्ञानिक बन पाते जिस रूप में हम आज भी उन्हें याद करते हैं?...एक टेस्ट या परीक्षा पूरे जीवन की कहानी नहीं लिख सकती. जीवन अनंत संभावनाओं से भरा हुआ है...अगर आप परीक्षा में असफल होते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक व्यक्ति के रूप में असफल हो गए.’

नरेंद्र मोदी ने इस किताब के जरिए परीक्षा में सफलता के लिए बच्चों को 25 मंत्र बताए हैं. और जैसा कि हमने पहले भी जिक्र किया है, ये मंत्र असल में जीवन की हर एक परीक्षा को सफलता से पास करने में मददगार साबित हो सकते हैं. यहां मोदी की मौलिक सोच और जमीनी अनुभव की गहरी खुशबू है. इसे जीवन को हर स्थिति में आकंठ जीने का हौसला रखने वाला व्यक्ति ही गुन और बुन सकता है. माता-पिता के नाम अपने एक छोटे से खत में नरेंद्र मोदी उन्हें सीख देते हुए लिखते हैं -

‘उम्मीदों का बोझ स्कूल बैग से भी भारी होता है, बच्चे को इस बोझ के नीचे दबाना उचित नहीं है...बच्चों के सपने, अभिलाषा और महत्वाकांक्षा अपने माता-पिता से अलग हो सकते हैं. इसे स्वीकार करें और अपने बच्चों को उनके सपने पूरा करने में मदद करें...

माता-पिता अपने बच्चे को अच्छा स्कूल, आरामदायक जीवन समेत सब कुछ अच्छा देना चाहते हैं. लेकिन एक सबसे अच्छा उपहार जो आप अपने बच्चे को दे सकते हैं, वह है - चुनौतियों का साहस के साथ सामना करने का जज्बा... मैंने अपने युवा दोस्तों को सुविधाजनक माहौल से बाहर निकलकर नए अनुभव लेने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की है. सुरक्षित जीवन शैली धीरे-धीरे मन और शरीर दोनों को कमजोर बनाकर पुरुषार्थ करने की क्षमता को ही खत्म कर देती है. चुनौतियां व्यक्तित्व में साहस और दृढ़-संकल्प पैदा करती हैं.’

इस किताब के सभी चित्रों में लड़का-लड़की दोनों को बराबर रूप से हर गतिविधि करते हुए दिखाया गया है. इससे लेखक की लैंगिक संवेदनशीलता की सोच भी पाठकों तक पहुंचती है. यह किताब इस मामले में अन्य सभी प्रेरणादायक पुस्तकों से अलग है कि यह न सिर्फ दिमाग बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर परिणाम के लिए उतना ही जरूरी बताती है. यानी तन और मन के संतुलित विकास को साधने की बेहद व्यावहारिक कुंजी इस किताब में बताई गई है. कर्मयोगी बनने की सलाह देती यह किताब बच्चों के माध्यम से बड़े लोगों को भी संवेदनशील इन्सान बनने की प्रेरणा देती है. यह उन असंख्य अंजान लोगों के प्रति कृतज्ञ होने की भी बात करती है जो हमारे लिये अदृश्य तरीके से आजीवन खटते रहते हैं.

‘एग्जाम वॉरियर्स’ में पठनीय सामग्री बहुत अधिक नहीं है. बल्कि यह कहना ज्यादा सही होगा कि यह बच्चों की एक बड़ी ही प्यारी सी ‘एक्टिविटी बुक’ है जिसमें गतिविधियां करते हुए छात्र-छात्रा मजे-मजे से कई ऐसे गुरूमंत्र सीख सकते हैं जो एग्जाम के साथ-साथ जीवन की रेस में भी बेहद उपयोगी साबित हों. यह किताब न सिर्फ एक अच्छा और सफल विद्यार्थी बनने की सीख देती है बल्कि एक बेहद संवेदनशील, रचनात्कता और संभावनाओं से भरा नागरिक बनने को भी प्रेरित करती है.