विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया कुछ दिन पहले एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गए. बीते बुधवार यानी सात मार्च को गुजरात के सूरत के नज़दीक राष्ट्रीय राजमार्ग-8 पर उनकी कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी. इस दुर्घटना में तोगड़िया तो बच गए, लेकिन उनसे जुड़ा पिछला प्रसंग सुर्ख़ी बटाेरने से नहीं बच पाया. वह ज़्यादा पुरानी नहीं इस साल जनवरी की बात है. उस वक़्त तोगड़िया अहमदाबाद स्थित विहिप कार्यालय से अचानक लापता हो गए थे. फिर एक दिन बाद ही वे शहर के ही एक अन्य इलाके से अचेत अवस्था में मिले. प्रवीण तोगड़िया को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज के दौरान ही उन्होंने रोते हुए आरोप लगाया कि उन्हें मुठभेड़ में मार गिराने की साज़िश की जा रही है. फिर बाद में उन्होंने सीधे तौर पर इस साज़िश का आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही जड़ दिया.

इसी बीच ख़बर यह भी आई कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) प्रवीण तोगड़िया को विहिप अध्यक्ष पद से हटाने की तैयारी कर रहा है. यह भी कि पुलिस मुठभेड़ हो या न हो पर सियासी मुठभेड़ में ज़रूर उनको ठिकाने लगाया जा सकता है. ऐसे में यह सवाल लाज़िमी है कि क्या वाक़ई तोगड़िया किसी के निशाने पर हैं? और अगर हैं तो क्याें? इन्हीं सवालों के ज़वाब जानने की कोशिश करते हैं.

अलग राह की तैयारी

बताया जाता है कि प्रवीण तोगड़िया इन दिनों एक क़िताब लिख रहे हैं. इसमें वे राम मंदिर आंदोलन के बारे में विस्तार से प्रकाश डालने वाले हैं. और उनके नज़दीकियों की मानें तो इस किताब में प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी की सरकार की ख़ास तौर पर तीखी आलोचना की जाने वाली है क्योंकि अब तक अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सका. कहा यह भी जा रहा है कि तोगड़िया इन दिनों संघ परिवार के दायरे से बाहर सक्रिय कई अन्य हिंदू संगठनों के संपर्क में भी हैं जैसे कि कर्नाटक में काम करने वाली श्रीराम सेना.

श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक सत्याग्रह की सहयोगी वेबसाइट स्क्रोलडॉटइन से बातचीत में इसकी पुष्टि भी करते हैं कि उनकी तोगड़िया से मुलाकात हुई है. प्रमोद बताते हैं, ‘राम मंदिर निर्माण के लिए वे (तोगड़िया) अपना अलग आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में हैं. उन्होंने मुझे बताया है कि वे इस सिलसिले में सभी हिंदू संगठनों का समर्थन मांगेंगे. ख़ास तौर पर उन संगठनों का जिनमें 2014 में यह उम्मीद जगी थी कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद अब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी हो जाएगा. लेकिन आगे उनकी यह उम्मीद टूट गई. और अब वे ख़ुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.’

तोगड़िया का मक़सद क्या है?

प्रवीण तोगड़िया के नज़दीकी लोगाें से बात करने पर पता चलता है कि वे 2019 में भारतीय जनता पार्टी को रोकना चाहते हैं. उनकी कोशिश यह है कि भाजपा फिर इस बार राम मंदिर को चुनावी मुद्दा न बना सके. इसके लिए संघ परिवार में अपने समर्थक वर्ग को लेकर अलग होना पड़े तो इसके लिए भी वे तैयार हैं.

संघ और विहिप में तोगड़िया के समर्थकों की तादाद अब भी ठीक-ठाक है इसकी मिसाल जनवरी में ही मिल गई थी जब वे लापता हुए थे. उस वक़्त उत्तर गुजरात के एक विहिप नेता ने बयान ज़ारी किया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य की पुलिस विहिप, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और तमाम हिंदुओं को सालों-साल से प्रताड़ित और परेशान कर रही है. उनके लापता होने का पता चलते ही गुजरात में विहिप कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किए थे. बताते हैं कि तोगड़िया अब इसी वर्ग को संघ परिवार से बाहर लाकर अपने साथ जोड़ना चाहते हैं.

इसीलिए संघ भी तोगड़िया को रास्ते से हटाना चाहता है

यही कारण है कि संघ भी प्रवीण तोगड़िया को विहिप प्रमुख के पद से हटाना चाहता है. संघ में ताेगड़िया के विरोधी चाहते हैं कि अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाना चाहिए क्योंकि वे अनुशासनहीन गतिविधियों पर उतारू हो गए हैं. हालांकि संघ में दूसरी तरफ़ यह चिंता भी है कि तोगड़िया पर सीधी कार्रवाई से कहीं कोई विरोध या असंतोष न पनप उठे. इसीलिए उन्हें बातचीत के जरिए राज़ी करने की कोशिश की जा रही है कि वे ख़ुद विहिप प्रमुख का पद छोड़ दें.

ख़बरों की मानें तो तोगड़िया से बातचीत कर उन्हें पद छोड़ने के लिए मनाने की ज़िम्मेदारी विहिप के ही दो बड़े नेताओं चंपक राय और सुरेंद्र जैन को सौंपी गई है. तोगड़िया के एक नज़दीकी सूत्र इसकी पुष्टि करते हुए बताते हैं, ‘चंपक राय और सुरेंद्र जैन की डॉक्टर साब (तोगड़िया) से बातचीत का एक ही एजेंडा है. वह यह कि विहिप प्रमुख का पद छोड़कर वे कोई अन्य ज़िम्मेदारी संभाल लें.’ हालांकि प्रवण तोगड़िया की गतिविधियां देखकर यह लगता नहीं कि वे आसानी से रास्ते से हट जाएंगे.