प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विकास के मानदंडों में पिछड़े 115 जिलों में युवा नौकरशाहों की नियुक्ति की जानी चाहिए. उन्होंने इन जिलों में बदलाव लाने के लिए अगले पांच साल में वहां युवा आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति की पैरवी की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवा आईएएस अधिकारी सरकार की चुनौतियों पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक प्रधानमंत्री ने ये बातें दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विधानसभा सम्मेलन में कहीं. उनके मुताबिक हाल में देश के 115 जिलों की समीक्षा के दौरान उन्होंने पाया कि 80 प्रतिशत जिलों के जिलाधिकारियों की उम्र 40 से 45 वर्ष है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस आयु वर्ग के अधिकारियों के बच्चे बड़े हो गए हैं और वे उनकी शिक्षा को लेकर चिंतित हैं, इसलिए बड़े शहरों में जाना चाहते हैं. उनका यह भी कहना था कि इनमें से बहुत से अफसर राज्य सिविल सेवाओं के प्रमोशन पाए अधिकारी हैं जो इन पदों पर तैनाती को सजा के तौर पर देखते हैं.

प्रधानमंत्री की बात को सरकार द्वारा आईएएस बनने की अधिकतम उम्र घटाने के संकेत के रूप में भी लिया जा रहा है. सिविल सेवा परीक्षा में बैठने की अधिकतम उम्र अभी 32 साल है. यूपीएससी इसे 28 साल करना चाहता है. प्रशासनिक सुधार को लेकर यूपीएससी द्वारा गठित बसवान कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही थी. रिपोर्ट के मुताबिक 70 प्रतिशत से ज्यादा छात्र 28 साल की उम्र में परीक्षा पास करते हैं. यह रिपोर्ट मंत्रियों के एक समूह को भेजी गई थी. सूत्रों की मानें तो अब यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय के पास है.

कहा जा रहा है कि युवा अफसरों की पैरवी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया है कि सरकार इस मसले पर कोई साहसिक फैसला ले सकती है. हालांकि कई अनुभवी अधिकारियों का यह भी कहना है कि ऐसे जटिल मुद्दे को लेकर अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.