उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के सोमवार को जारी हुए आंकड़े केंद्र सरकार के लिए राहत लेकर आए हैं. इनके अनुसार पिछले महीने यानी फरवरी 2018 में खुदरा महंगाई दर एक बार फिर घटकर 4.44 फीसदी रह गई है. जनवरी में यह आंकड़ा 5.07 फीसदी था. इस तरह पिछले दो महीनों में खुदरा महंगाई दर में कुल 77 आधार अंकों की कमी हो चुकी है. यह पिछले चार महीने में सबसे कम है. इससे पहले नवंबर 2017 में सीपीआई 4.88 फीसदी रही थी.

दूसरी ओर सीपीआई के साथ ही जारी होने वाले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े भी सरकार के लिए राहत भरे रहे हैं. केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के अनुसार जनवरी में आईआईपी में 7.5 फीसदी की वृद्धि हुई है. एक महीने पहले यानी दिसंबर में यह आंकड़ा 7.1 फीसदी का रहा था. इससे साल भर पहले यानी 2017 की जनवरी में आईआईपी वृद्धि दर 3.5 फीसदी ही थी.

सीएसओ ने बताया है कि खुदरा महंगाई के कम होने का मुख्य कारण खाने-पीने के सामानों का सस्ता होना रहा है. आंकड़ों के अनुसार फरवरी में खाद्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) केवल 3.26 फीसदी की दर से बढ़ा है जबकि जनवरी में इसमें 4.70 फीसदी की तेजी हुई थी. इस तरह पिछले दो महीनों में खाने-पीने के खुदरा सामानों की महंगाई दर 1.7 फीसदी घट चुकी है. सीपीआई में खाने-पीने के उत्पादों का हिस्सा आधा से थोड़ा ही कम यानी 46 फीसदी होता है. फरवरी में फलों को छोड़कर खाने-पीने के ज्यादातर सामान जैसे सब्जियां, अंडे, दाल, चीनी और मिठाइयां सस्ती हुई हैं. कीमतों में सबसे ज्यादा कमी सब्जियों के मामले में हुई है.

जानकारों के अनुसार ये दोनों ही खबरें मोदी सरकार के लिए अच्छी हैं क्योंकि दोनों आंकड़े सकारात्मक होने के साथ अर्थशास्त्रियों की उम्मीद से भी बेहतर हैं. रॉयटर्स ने अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में कहा था कि फरवरी में खुदरा महंगाई दर 4.80 फीसदी से बढ़ सकती है और औद्योगिक उत्पादन में 7.67 फीसदी तक की तेजी आ सकती है. हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आज के आंकड़ों से मोदी सरकार को ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि गर्मी के मौसम में महंगाई के बढ़ने का अंदेशा है. वैसे भी खुदरा महंगाई का मौजूदा स्तर आरबीआई के मध्यकालिक औसत लक्ष्य चार फीसदी से ज्यादा है.