समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य सभा सांसद नरेश अग्रवाल ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है. उन्होंने यह घोषणा दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की है. इस मौके पर रेल मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे. उत्तर प्रदेश की हरदोई विधानसभा सीट से सात बार विधायक रह चुके नरेश अग्रवाल को उनके विवादित बयानों के लिए भी पहचाना जाता है. दिलचस्प बात है कि सपा छोड़ते हुए भी उन्होंने विवादित बयानबाजी में कोई कसर नहीं छोड़ी और जया बच्चन को लेकर एक विवादित टिप्पणी कर डाली.

सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा है, ‘राज्यसभा के लिए सपा ने मुझे प्रत्याशी नहीं चुना. मेरी टिकट उसे दे दी गई जो फिल्मों में नाचने का काम करती है.’ नरेश अग्रवाल ने कहा कि पार्टी के इस फैसले से वे आहत हैं इसीलिए उन्होंने और उनके बेटे नितिन अग्रवाल ने भाजपा के साथ जुड़ने का फैसला किया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि आगामी राज्यसभा चुनाव के दौरान नितिन भाजपा के लिए वोट करेगा.

सपा ने बीते हफ्ते जया बच्चन को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाने की घोषणा की थी. इस फैसले के बाद से ही नरेश अग्रवाल पार्टी से नाराज थे. इधर सपा के पास केवल 47 विधायक होने से वह सिर्फ एक प्रत्याशी को ही जितवाकर राज्यसभा में भेज सकती है. इस चुनाव में सपा के कुछ विधायक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार को भी समर्थन देंगे. इस बीच ताजा घोषणा के बाद नितिन अग्रवाल का वोट अगर भाजपा प्रत्याशी को जाता है तो बसपा प्रत्याशी के वोटों का समीकरण बिगड़ जाएगा.

वैसे इसी साल जनवरी में नरेश अग्रवाल और गृह मंत्री राजनाथ सिंह की आपस में मुलाकात हुई थी. उसके बाद से ही अटकलें लगने लगी थीं कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं. लेकिन तब उन्होंने इसे अफवाह बताया था.

इधर प्रेस वार्ता के दौरान नरेश अग्रवाल ने आगे कहा है, ‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अ​मित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से काफी प्रभावित हूं. मैं समझता हूं कि जब तक आप किसी राष्ट्रीय दल का हिस्सा नहीं होते, आप समाज के लिए कुछ बड़ा नहीं कर पाते. मैं मुलायम सिंह यादव और राम गोपाल यादव का अब भी बेहद सम्मान करता हूं. लेकिन मौजूदा परिदृश्य में सपा का कांग्रेस और बसपा के साथ किया गया गठजोड़ निराशाजनक है.’

नरेश अग्रवाल का लंबा राजनीतिक करियर रहा है. साल 1980 में वे पहली बार कांग्रेस के टिकट पर हरदोई से विधायक चुने गए थे. इसके बाद 1989 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी. फिर उन्होंने आॅल इंडिया डेमोक्रेटिक पार्टी का गठन किया था. सपा में शामिल होने से पहले कुछ समय के लिए वे बसपा के साथ भी जुड़े. मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान वे उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री भी रहे. आगे चलकर सपा पर वे राज्यसभा सांसद भी चुने गए.