बीते कुछ समय से वैश्विक अर्थव्यवस्था फिर गति पकड़ती दिख रही है, लेकिन अब इसे यह गति बरकरार रखने के लिए एक बड़ी चुनौती से पार पाना होगा. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील और एल्यूमीनियम पर आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है और इसके चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक व्यापार युद्ध में फंसने का खतरा पैदा हो गया है.

ट्रंप ने स्टील पर 25 और एल्यूमीनियम पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाने के फैसले को जायज ठहराते हुए कहा है कि अमेरिका उस मुक्त व्यापार का समर्थन नहीं करेगा जिसमें उसे भारी नुकसान उठाना पड़े. अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक वे उस मुक्त व्यापार के समर्थक हैं जिसमें पारदर्शी तरीके से बराबरी का कारोबार हो.

ट्रंप प्रशासन के इस फैसले का भारत पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ना है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रशासन के मुताबिक भारत का स्टील निर्यात में 14वां स्थान है. वित्त वर्ष 2016-17 के आंकड़ों की बात करें तो भारत में कुल 228 हजार मीट्रिक टन स्टील का उत्पादन हुआ था और इसका सिर्फ पांच प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया गया था. इसमें भी ज्यादातर निर्यात बेल्जियम, थाइलैंड और वियतनाम आदि देशों को हुआ था. हालांकि अमेरिकी सरकार के इस फैसले से भारत की वे कंपनियां जरूर प्रभावित हो सकती हैं जो स्टील के पाइप और ट्यूब का निर्यात करती हैं. इनका 34 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है.

दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में अर्थव्यवस्था सुस्ती से उबर रही है और अमेरिका का यह फैसला इस आर्थिक प्रक्रिया के लिए मुफीद नहीं है. यही असर भारत में स्टील उत्पादन पर भी पड़ सकता है क्योंकि बीते कुछ समय से इसमें बढ़ोत्तरी देखी जा रही है. वित्त वर्ष 2016-17 में भारत ने कुल 49 लाख मीट्रिक टन स्टील का निर्यात किया था जबकि इसके एक साल पहले यह आंकड़ा महज 18 लाख टन था.

ताजा हालात में भारतीय स्टील उत्पादकों को नया बाजार तलाशना होगा या फिर यूरोप सहित स्टील के दूसरे उत्पादकों से भारतीय बाजार में कड़े मुकाबले के लिए तैयार होना होगा.

दुनिया के तमाम देशों के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी अमेरिकी सरकार का यह फैसला एक चेतावनी की तरह होना चाहिए. पिछले दिनों अमेरिका फर्स्ट के अपने नारे को दोहराते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दूसरे देशों के नेताओं के लिए भी उनका देश ही सबसे पहले होना चाहिए.

भारत के लिए इसका मतलब है कि हमारी सरकार भी स्थानीय स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादकों को संरक्षण दे. फिलहाल हमारे यहां सरकारी खरीद के लिए स्टील, लोहे और एल्यूमीनियम के स्थानीय उत्पादकों को वरीयता देने की नीति लागू है, लेकिन अब समय आ गया कि मोदी सरकार इस नीति से आगे बढ़कर इस क्षेत्र को सहारा दे. (स्रोत)