बचत खातों में ​एवरेज मिनिमम बैलेंस यानी औसत न्यूनतम रकम न रख पाने वाले ग्राहकों से सभी बैंक जुर्माना वसूलते हैं. ऐसा करने वालों में स्टेट बैंक आॅफ इंडिया (एसबीआई) भी शामिल है. लेकिन मंगलवार को एसबीआई ने इस जुर्माने में 75 फीसदी तक की कटौती करने की घोषणा की है. इस फैसले से 25 करोड़ ग्राहकों को सीधा फायदा पहुंचेगा. संशोधित दरें अगले महीने की एक तारीख से लागू होंगी.

अभी महानगरों और शहरी इलाकों में एएमबी बरकरार न रखने वाले बचत खाता ग्राहकों से एसबीआई 50 रुपये प्रतिमाह का जुर्माना वसूलता है. इस पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अलग से लगता है. लेकिन अब अगले महीने से ऐसे ग्राहकों पर 15 रुपये प्रतिमाह का जुर्माना ही लगेगा. इसी तरह अर्ध शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 40 रुपये से घटाकर 12 और 10 रुपये किया गया है. एसबीआई के प्रबंध निदेशक पी के गुप्ता ने कहा है कि बैंक ने यह फैसला ग्राहकों से मिली फीडबैक के बाद किया है.

वैसे यह पहला मौका नहीं है कि जब एसबीआई ने इस जुर्माने की दर घटाई है. इससे पहले अक्टूबर 2017 में भी उसने इस दर में 20 से 50 फीसदी की कटौती की थी. हालांकि तब उसने यह फैसला चौतरफा आलोचना और सरकार के दबाव में किया था. उस वक्त आई खबरों में कहा गया था कि ग्राहकों पर जुर्माना लगाकर एसबीआई ने 1771 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है.

एसबीआई ग्राहक को शहरी क्षेत्रों के बचत खातों में तीन हजार रुपये, अर्ध शहरी क्षेत्रों में दो हजार और ग्रामीण इलाकों में एक हजार रुपये का मिनिमम बैलेंस रखना होता है. अगर खातों में औसत रकम इससे कम होती है तो बैंक ग्राहक से जुर्माना वसूलता है.