जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) अपने कुछ डीन और विभाग प्रमुखों को बदलने की तैयारी कर रहा है. इससे यूनिवर्सिटी में नया विवाद पैदा होने की आशंका जताई जा रही है. बताया जाता है कि जेएनयू की कार्यकारी परिषद (ईसी) की इसी मंगलवार को अहम बैठक हुई थी. इसमें इन विभाग प्रमुखों को बदलने का फ़ैसला किया गया है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यूनिवर्सिटी के कुछ विभाग प्रमुखों और डीन ने अनिवार्य उपस्थिति के नियम का विरोध किया है. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित में इसके ख़िलाफ़ अपनी राय भी भेजी है. कहा जा रहा है कि ईसी की बैठक में इसी आधार पर उनके ख़िलाफ़ पहले जांच कराने का फ़ैसला किया गया है. इसमें यदि उनकी ग़लती साबित होती है तो उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है.

यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने बताया, ‘विभाग या केंद्रों के प्रमुख और डीन प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा हैं. छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को लोकतांत्रिक तरीके से किसी भी मुद्दे का विरोध करने का अधिाकर है. मगर यदि विभागों के अध्यक्ष और डीन आदि किसी मसले का लिखकर विरोध करने लगें तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसीलिए ईसी की बैठक में यह निर्णय किया गया कि पहले जांच कराई जाए कि कुछ विभाग प्रमुखों-डीन ने इस तरह लिखकर विरोध (अनिवार्य उपस्थिति के नियम का) दर्ज़ कराने की पहल क्यों की.’

ग़ौरतलब है कि जेएनयू ने बीते दिसंबर में छात्र-छात्राओं के लिए 75 फ़ीसदी अनिवार्य उपस्थिति के नियम की घोषणा की थी. इसके ख़िलाफ़ तभी से विश्वविद्यालय परिसर में विरोध हो रहा है. कई कक्षाएं तो जनवरी महीने से खुले आसमान के नीचे ही लगाई जा रही हैं. विरोध में कई शिक्षक भी छात्र-छात्राओं का साथ दे रहे हैं. इसी क्रम में यूनिवर्सिटी के क़रीब सात विभाग प्रमुखों आदि ने प्रशाासन को लिखित में अपना विरोध दर्ज़ कराया है. यूनवर्सिटी के विभिन्न विभागों में 13 डीन, 38 विभाग प्रमुख और पांच केद्र अध्यक्ष हैं.