मालदीव ने कहा है कि मौजूदा संकट उसका अंदरूनी मसला है जिसमें भारत को नहीं पड़ना चाहिए. मालदीव सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री मोहम्मद शाइनी ने मंगलवार को कहा, ‘मालदीव ने कश्मीर मुद्दे पर न तो कभी दखल दिया न ही मध्यस्थता की पेशकश की क्योंकि वह भारत का आंतरिक मामला है. इसी तरह भारत को भी हमारे आंतरिक मामले में दखल नहीं देना चाहिए.’

मालदीव में कुछ राजनीतिक बंदियों की रिहाई के आदेश के बाद सरकार और सुप्रीम कोर्ट में तनातनी हो गई थी. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था और फिर राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने देश में आपातकाल लगा दिया था. इसके बाद चर्चाएं हो रही थीं कि भारत हिंद महासागर में बसे इस देश में सैन्य दखल दे सकता है. वह एक बार पहले भी ऐसा कर चुका है.

मोहम्मद शाइनी मौजूदा संकट को हल करने के लिए बनी सभी पार्टियों की एक समिति के मुखिया भी हैं. उन्होंने इस बात को भी खारिज किया कि भारत की अपेक्षा मालदीव अब चीन के ज्यादा करीब है. उन्होंने कहा, ‘इंडिया फर्स्ट की नीति पर चलते हुए मालदीव अब भी उसका सम्मान एक बड़े भाई के तौर ही पर करता है.’ राजनीतिक संकट के समाधान पर शाइनी ने कहा कि एक ‘तीसरा पक्ष’ भी बातचीत में शामिल है. हालांकि उन्होंने इस पक्ष के नाम का उन्होंने खुलासा नहीं किया. यह जरूर कहा कि वह न तो भारत है और न ही चीन. हालांकि इससे पहले फरवरी में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने मालदीव को राजनीतिक संकट से मुक्त कराने के लिए बातचीत कराने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन वहां की सरकार ने उस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी थी.