सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद में तीसरे पक्ष से जुड़ी सभी हस्तक्षेप याचिकाओं को खारिज कर दिया है. वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक बुधवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने रजिस्ट्रार कार्यालय को निर्देश दिया कि वह अब इस मामले में कोई भी हस्तक्षेप याचिका स्वीकार न करे. इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अब केवल मूल पक्षकारों को ही जिरह करने की इजाजत दी जाएगी. इस मामले में अब अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी.

रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष अदालत ने भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की भी हस्तक्षेप याचिका को खारिज कर दिया है. हालांकि, अदालत ने सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका को दोबारा सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने अयोध्या में पूजा करने को अपना मौलिक अधिकार बताया था और इसे बहाल करने की मांग की थी. इससे पहले अयोध्या विवाद के मूल पक्षकारों और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया था कि यह दीवानी मामला है, इसलिए दूसरे पक्षों को इसमें शामिल होने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया है, जिसमें अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को ‘धर्मनिरपेक्ष’ उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने का आदेश देने की मांग की गई थी. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यह याचिका श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे 32 जाने-माने लोगों ने लगाई थी.