भारत की जेलों में पाकिस्तान के 307 कैदी बंद हैं. इनमें कुछ मछुआरे भी शामिल हैं. पाकिस्तान के इन कैदियों में से 56 अपनी सजा काट चुके हैं. फिर भी उन्हें रिहा नहीं किया जा पा रहा. भारत इन्हें वापस इनके देश पाकिस्तान भेजना चाहता है लेकिन इसे लेकर इस्लामाबाद का नजरिया कुछ और ही है. वह इन्हें अपने देश का नागरिक ही नहीं मानता. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ने एक हलफनामे के जरिये यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है.

गृह मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को यह हलफनामा जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच को सौंपा गया. इसमें यह भी कहा गया है कि कैदियों को लेकर पाकिस्तान सरकार से कई मौकों पर बातचीत की गई, लेकिन वह उन्हें अपने देश ले जाने में रुचि नहीं दिखा रही. इसके अलावा सजा काट चुके कैदियों को इसलिए नहीं रिहा किया जा सकता क्योंकि वे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में बंद पाकिस्तानी कैदियों के मामले को 2005 से देखना शुरू किया था. इस दौरान सजा काट चुके विदेशी कैदियों को उनके देश भेजने के लिए कोर्ट ने सरकार से मुनासिब प्रक्रिया अपनाने को कहा था. जहां तक पाकिस्तानी कैदियों की बात है तो ताजा हलफनामे में शीर्ष अदालत से यह भी कहा गया है कि पिछले साल जुलाई और नवंबर के बीच 20 कैदी पाकिस्तान भेजे गए. पांच और कैदियों को उनके देश भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है.