अपनी पत्नियों (परित्यक्ता) को भारत में ही छोड़कर विदेश में रह रहे अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को सजा दिलवाने की महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की योजना एक बड़े ही दिलचस्प कारण से आगे नहीं बढ़ पा रही है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा तैयार एक प्रस्ताव में सजा के दूसरे प्रावधानों के साथ इन एनआरआई का पासपोर्ट रद्द करना भी शामिल है. लेकिन मेनका गांधी के ही एक पुराने मामले की वजह से पासपोर्ट रद्द करने का प्रावधान इस प्रस्ताव में शामिल करना मुश्किल हो गया है. कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 1978 में मेनका गांधी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो दिशा-निर्देश दिए थे उनके आधार पर अब बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति का पासपोर्ट जब्त या रद्द नहीं किया जा सकता.

1978 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने बिना कोई विशेष कारण बताए ‘जनहित’ का हवाला देते हुए मेनका गांधी का पासपोर्ट जब्त करने का आदेश दिया था. लेकिन जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो अदालत का कहना था कि पासपोर्ट जब्त किए जाने से मेनका गांधी के मूल अधिकारों (समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का हनन हुआ है और केंद्र सरकार यह आदेश नहीं दे सकती. उस समय यह मामला मेनका गांधी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के नाम से चर्चित हुआ था.

वर्तमान नियमों के मुताबिक पासपोर्ट सिर्फ आपराधिक मामलों में जब्त या रद्द किए जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील सुनील फर्नांडीज इस रिपोर्ट में कहते हैं कि अगर हिंदू विवाह अधिनियम के तहत देखा जाए तो किसी शादीशुदा व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को छोड़ना दीवानी मामला होता है. साथ ही फर्नांडीज इस प्रावधान से जुड़ी एक और दिक्कत का जिक्र करते हैं. उनके मुताबिक, ‘अगर किसी का पासपोर्ट रद्द किया जाता है तो फिर यह उस व्यक्ति के लिए विदेश में शरण लेने का आधार भी बन जाता है.’

पिछले साल मेनका गांधी ने पत्नियों को छोड़कर विदेश जाने वाले पतियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की बात कही थी और बाद में उनके मंत्रालय ने इससे जुड़ा एक प्रस्ताव तैयार किया था. इसमें सबंधित व्यक्ति का पासपोर्ट रद्द करने के अलावा उसके रिश्तेदारों की संपत्तियां जब्त करने का भी प्रावधान है. कहा जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर कानून मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने सख्त आपत्ति जताई है. इन मंत्रालयों से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पासपोर्ट जब्त करने के अलावा भी किसी एनआरआई को सजा देने के लिए उसके रिश्तेदारों की संपत्ति जब्त करना न्याय संगत नहीं होगा.