मालदीव ने आपातकाल को अब आगे और न बढ़ाने की बात कही है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार विदेशी पत्रकारों के एक संगठन से बातचीत में श्रीलंका में मालदीव के राजदूत मोहम्मद हुसैन शरीफ ने कहा, ‘अगर हिंसा जैसे असामान्य हालात को छोड़ दिया जाए तो सरकार की आपातकाल को आगे बढ़ाने की कोई मंशा नहीं है.’ मालदीव में यह राजनीतिक संकट सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का आदेश देने के बाद आया था. इस आदेश को मानने से इनकार करते हुए राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने पांच फरवरी को 15 दिन के लिए आपातकाल लगा दिया था. इसे बाद में 30 दिन के लिए बढ़ा दिया गया था. इसकी समय सीमा 22 मार्च को खत्म हो रही है.

मालदीव के राजदूत मोहम्मद हुसैन शरीफ ने यह भी बताया है कि सरकार का तख्तापलट करने के आरोप में गिरफ्तार पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम, चीफ जस्टिस अब्दुल्ला सईद और सुप्रीम कोर्ट के जज अली हमीद पर रिश्वतखोरी का मामला चलाया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम पर यमीन सरकार का तख्ता पलट करने के लिए तीन कानूनी पेशवरों को रिश्वत देने का आरोप है.

उधर, मालदीव के राजदूत ने आपातकाल के दौरान 100 से ज्यादा नेताओं को गिरफ्तार किए जाने के विपक्ष के दावों को खारिज किया है. मोहम्मद हुसैन शरीफ ने कहा कि आपातकाल के दौरान अब तक केवल 38 नेताओं को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि, मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि अब्दुल्ला यामीन प्रशासन आपातकाल को नागरिक समाज के लोगों, जजों और राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लाइसेंस के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है.