सेशेल्स में सैन्य अड्डा बनाने की भारत की योजना मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है. खबरों के मुताबिक मंगलवार को विपक्षी दलों के गठबंधन लिन्योन डेमोक्रेटिक सेसेल्वा ने कहा है कि वह भारत के साथ इससे जुड़े समझौते को संसद में मंजूरी नहीं देगा. इस गठबंधन के प्रमुख वावेल रामकलावन ने कहा, ‘यह समझौता खत्म हो गया है.’ सेशेल्स की संसद में इस विपक्षी गठबंधन का बहुमत है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस महीने की शुरुआत में इस समझौते की गोपनीय प्रतियां लीक हो गई थी. इनके आधार पर आरोप लगाया गया था कि सेशेल्स ने अपना अजंपशन द्वीप भारत को बेच दिया है. इसके बाद संसद में सेशेल्स के राष्ट्रपति डेनी फॉरे ने कहा था, ‘अजंपशन द्वीप सेशेल्स और सेशेल्सवासियों का है. इसकी जमीन न तो भारत को बेची जा सकती है, न ही लीज पर दी जा सकती है.’
सेशेल्स के साथ इस समझौते के तहत सैन्य अड्डा बनाने के लिए भारत को लगभग 3,586 करोड़ रुपये का निवेश करना है. इसे दक्षिणी हिंद महासागर में भारतीय जहाजों की सुरक्षा देने और चीन द्वारा जिबूती में स्थापित सैन्य अड्डे को लेकर संतुलन कायम करने के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है. इस समझौते के बारे में पहली घोषणा 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान हुई थी. हालांकि, बाद में इस समझौते को लेकर कुछ मतभेद भी सामने आए थे. लेकिन इन्हें दूर करते हुए जनवरी, 2018 में दोनों देशों ने नए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
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