सोशल मीडिया व इंटरनेट कंपनियों द्वारा यूजर्स का डेटा इस्तेमाल करने के मामले में केंद्र सरकार ने उच्च-स्तरीय जांच शुरू कर दी है. सूत्रों ने बताया है कि डेटा का गलत इस्तेमाल होने से रोकने के लिए यह जांच शुरू की गई है. खबर के मुताबिक फेसबुक डेटा लीक मामला सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती बयानबाजी को देखते हुए सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने तुरंत बैठक बुलाई जिसके बाद जांच शुरू करने का फैसला किया गया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एक सूत्र ने बताया, ‘सरकार यूजर के डेटा को इस्तेमाल करने की कोशिशों को गंभीरता से लेती है. यह ऐसा काम है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. इसीलिए इंटरनेट कंपनियों और उनके खरीदारों की विस्तृत जांच शुरू की गई है.’ इससे पहले सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने चुनाव प्रक्रिया और वोटरों को प्रभावित करने के लिए कैंब्रिज एनालिटिका की सेवाएं ली थीं. वहीं, कांग्रेस ने भी सरकार के आरोपों का जवाब दिया. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इराक में मारे गए भारतीयों के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा ने फेसबुक डेटा लीक मामले में कांग्रेस का नाम उछाला है.

गुरुवार को फेसबुक से डेटा चोरी होने के मामले में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अपनी गलती मानी थी. जुकरबर्ग ने कहा कि यूजर्स के डेटा की सुरक्षा करना फेसबुक की जिम्मेदारी है और अगर वह इसमें असफल होता है तो कंपनी को यूजर्स की सेवा करने का अधिकार नहीं है. यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब कैंब्रिज एनालिटिका नाम की फर्म ने माना कि उसने पांच करोड़ यूजर्स की अनुमति के बिना उनका डेटा इस्तेमाल किया है. रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी अभियान में भी अपनी सेवाएं दी थीं. माना जाता है कि संभवतः चुनाव को प्रभावित करने के मकसद से कैंब्रिज एनालिटिका ने यूजर्स का डेटा अनुचित ढंग से हासिल किया था.