राज्य सभा की 59 सीटों में से 26 पर शुक्रवार को हुए मतदान के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. इसमें केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा का प्रदर्शन सबसे बढ़िया रहा. उसने उत्तर प्रदेश की 10 में से नौ सीटें जीत ली हैं, वहीं एक सीट सपा के खाते में गई है. यहां एक सीट पर भाजपा और बसपा के बीच कांटे की टक्कर थी और आज मीडिया में इस सीट का चुनाव खासी चर्चा में रहा. इस पर ​बसपा के प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर सपा और कांग्रेस के समर्थन के बावजूद भाजपा के अनिल अग्रवाल के सामने हार गए हैं. इससे पहले राज्य सभा के ताजा चुनाव के लिए 33 उम्मीदवार 15 मार्च को ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए थे.

जानकारों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के समर्थन के बावजूद बसपा के प्रत्याशी के चुनाव हार जाने का असर सपा और बसपा के भावी गठबंधन पर भी पड़ सकता है. गोरखपुर और फूलपुर के हालिया लोकसभा उपचुनाव में सपा के हाथों भाजपा के हार जाने के बाद राज्य सभा का यह चुनाव राजनीतिक लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो गया था. कहा जाता है कि उपचुनाव में समर्थन के बदले बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा के सामने शर्त रखी थी कि उसके प्रत्याशी को राज्य सभा भेजने के लिए समर्थन दिया जाए. हालांकि ऐसा होने के बावजूद बसपा उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है. वैसे फिलहाल सपा और बसपा नेताओं ने दावा किया है कि दोनों दलों के भावी गठबंधन पर इस नतीजे का कोई असर नहीं पड़ेगा.

बाकी राज्यों के नतीजे

पश्चिम बंगाल की पांच में से चार राज्य सभा सीटें सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई है जबकि एक सीट कांग्रेस ने जीती है. कर्नाटक की चार में से तीन सीटें कांग्रेस ने जीती हैं. बाकी एक सीट भाजपा को मिली है. तेलंगाना की तीनों सीटें राज्य की सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति के खाते में गई हैं. उधर झारखंड की दो सीटें भाजपा और कांग्रेस के बीच बंट गई हैं. छत्तीसगढ़ की एकमात्र सीट पर प्रदेश भाजपा की तेजतर्रार नेत्री सरोज पांडे को जीत मिली है. केरल की अकेली सीट के लिए हुए उपचुनाव में वाम मोर्चे के सहयोग से पूर्व सांसद एमपी वीरेंद्र कुमार ने एक बार फिर जीत दर्ज की है. वे जदयू की केरल इकाई के अध्यक्ष हैं. उन्हें जदयू के पूर्व नेता शरद यादव का समर्थक माना जाता है.

इस तरह जिन 26 सीटों पर मतदान हुआ उनमें से 12 सीटों पर भाजपा जीतने में कामयाब हुई है. वहीं पांच सीटों पर कांग्रेस, चार पर तृणमूल कांग्रेस, तीन पर तेलंगाना राष्ट्र समिति और एक-एक सीट पर सपा और केरल के वाम मोर्चे के उम्मीदवार को जीत मिली है. इसके अलावा राज्य सभा के इन चुनावों में 10 राज्यों की 33 सीटों पर मतदान की नौबत ही नहीं आ सकी थी. 15 मार्च को नाम वापस लेने के अंतिम दिन इन सीटों पर एकमात्र नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया था.

इनमें सबसे ज्यादा छह-छह सीटें बिहार और महाराष्ट्र में हैं. बिहार में जदयू (दो) और भाजपा (एक) के सत्ताधारी गठबंधन को तीन सीटें मिलीं जबकि राजद (दो) और कांग्रेस (एक) के विपक्षी गठबंधन को भी तीन सीटें मिली हैं. महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा (तीन) और शिवसेना (एक) गठबंधन को चार सीटें मिली हैं. वहीं कांग्रेस और एनसीपी के खाते में एक-एक सीटें गई हैं.

मध्य प्रदेश की पांच सीटों पर भी चुनाव नहीं करवाना पड़ा. वहां चार सीटें भाजपा और एक कांग्रेस को मिली हैं. गुजरात की खाली हुई चार सीटों में से भाजपा और कांग्रेस दोनों को दो-दो सीटें मिली हैं. उधर आंध्र प्रदेश की तीन सीटों में से दो तेलुगु देशम पार्टी के जबकि एक वाईएसआर कांग्रेस के खाते में गई है. ओडिशा और राजस्थान में तीन-तीन सीटें खाली हुई थी. इन राज्यों में सभी सीटें सत्ताधारी पार्टी यानी क्रमश: बीजू जनता दल और भाजपा ने जीती हैं. इसके अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक-एक सीट खाली हुई थीं. ये सभी सीटें इन राज्यों में सत्तारूढ़ रही भाजपा के खाते में गई हैं.

इन नतीजों के साथ राज्य सभा में एनडीए और मजबूत हुआ

राज्य सभा के ताजा चुनाव के बाद संसद के उच्च सदन में भाजपा और एनडीए की स्थिति पहले से मजबूत हो गई है. भाजपा को इस चुनाव में कुल 28 सीटें मिली हैं और इस तरह उसे 11 सीटों का फायदा हुआ है. राज्य सभा में भाजपा का संख्या बल अब 58 से बढ़कर 69 हो गया है. दूसरी ओर एनडीए के राज्य सभा सांसदों की कुल संख्या 77 से बढ़कर 87 हो गई है.

वहीं इस चुनाव में कांग्रेस को तीन सीटों का नुकसान हुआ है और उसके केवल 10 प्रत्याशी ही विजयी हो पाए हैं. इससे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए के राज्य सभा सांसदों की संख्या 68 से घटकर 66 रह गई है. उधर इस चुनाव के बाद एनडीए और यूपीए खेमे से बाहर रहने वाले बाकी दलों के सांसदों की कुल संख्या में दो की कमी हो गई है. शुक्रवार को संपन्न चुनाव में इन दलों के खाते में 21 सीटें गई हैं. इस तरह राज्य सभा में ऐसे दलों के सदस्यों की कुल संख्या अब 79 के बजाय 77 रह गई है.