केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की रांची स्थित विशेष अदालत ने चारा घोटाले से जुड़े दुमका कोषागार मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को 14 साल की जेल की सजा सुनाई है. द हिंदू के अनुसार अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत सात साल और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत भी सात साल की जेल की सजा सुनाई है. सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह ने कहा है कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को यह सजा क्रमानुसार (एक पूरी होने पर दूसरी) काटनी होगी. अदालत ने उन पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. राजद प्रमुख के वकील प्रभात कुमार ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है.

अदालत ने बीते सोमवार को इस मामले में लालू प्रसाद यादव के साथ 14 अन्य आरोपितों को दोषी ठहराया था. वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया था. यह मामला दुमका कोषगार से दिसंबर 1995 से नवंबर 1996 के बीच 3.13 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है. इस दौरान लालू प्रसाद यादव अविभाजित बिहार के मुख्यमंत्री थे.

चारा घोटाले से जुड़ा यह चौथा मामला है, जिसमें राजद प्रमुख को सजा सुनाई गई है. इससे पहले देवघर कोषागार मामले में अदालत ने उन्हें साढ़े तीन साल, जबकि चाईबासा कोषागार मामले में पांच साल की जेल की सजा सुनाई थी. चाईबासा मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को भी पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. लेकिन अदालत ने उन्हें देवघर मामले में बरी कर दिया था. वहीं, चारा घोटाले से जुड़े बांका और भागलपुर कोषागार मामले में लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा को पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई गई है. चारा घोटाले में उनके खिलाफ अभी दो मामलों में फैसला आना बाकी है.

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव देवघर कोषागार मामले में फैसला आने के बाद से रांची स्थित बिरसा मुंडा जेल में हैं. इस बीच उन्हें इलाज के लिए रांची के एक अस्पताल में लाया गया है. राजद प्रमुख ने जमानत के लिए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई थी.