तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सहयोगी रहीं शशिकला के संबंध में एक और अहम ख़ुलासा हुआ है. इसमें पता चला है कि 2011 से पहले तक एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) और उसकी सरकार में शशिकला की निर्णायक भूमिका हुआ करती थी. वह भी इतनी अहम कि मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए अधिकारियों और चुनाव में एआईएडीएमके उम्मीदवारों का चयन भी शशिकला ही करती थीं.

द हिंदू के मुताबिक जयललिता की मौत की जांच कर रहे आयोग के सामने शशिकला की भतीजी कृष्णप्रिया ने यह बयान दिया है. जयललिता की मौत की जांच जस्टिस अरुमुगस्वामी आयोग कर रहा है. उसके सामने कृष्णप्रिया ने दो जनवरी 2018 को यह बयान दिया था. ग़ौर करने की बात है कि शशिकला और उनकी भाभी तथा कृष्णप्रिया की मां जे इलावारसी इन दिनों बेंगलुरू की केंद्रीय जेल में सजा काट रही हैं. वे भ्रष्टाचाार के मामले में दोषी हैं.

कृष्णप्रिया के मुताबिक 2011 तक तो स्थिति यह थी कि जिला कलेक्टरों से सचिवालय और पुलिस विभाग के अफसरों तक का तबादला-पदस्थापना शशिकला के इशारे पर होता था. पार्टी विधायकों-पदाधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई आदि शशिकला के निर्देशों के हिसाब से ही की जाती थी. हालांकि 2012 के बाद से जयललिता ने उनके इस तरह के अधिकारों में ख़ासी कटौती कर दी थी.

ग़ौरतलब है कि अभी दो दिन पहले पता चला था कि जयललिता के इलाज़ के दौरान 75 दिनों तक चेन्नई के अपोलो अस्पताल के सभी सीसीटीवी (क्लोज़ सर्किट टेलीविज़न) कैमरे बंद थे. अपोलो अस्पताल के चेयरमैन डॉक्टर प्रताप सी रेड्‌डी ने ख़ुद मीडिया के सामने यह ख़ुलासा किया था. इन ख़ुलासों के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों शशिकला की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.