विदेश यात्रा पर निकलने से पहले सेहत से जुड़ी कौन-कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए, इससे संबंधित आलेख का पहला हिस्सा हम इसी स्तंभ के तहत पिछली बार पढ़ चुके हैं. अब इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हैं.

विदेश जाने से पहले अगर आप अपनी यात्रा से जुड़ी कुछ बुनियादी बातें स्पष्ट कर लेंगे तो भ्रमण के दौरान स्वस्थ रहेंगे. जैसे -

  1. वहां का मौसम और आमतौर पर मौसम बदलाव के पैटर्न क्या हैं?
  2. आपको वहां कुल कितने दिन रहना है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी जाएंगे?
  3. वहां बीमार हुए या वहां कभी अस्पताल में भर्ती होने की नौबत बनी तो क्या आपका टूर ऑपरेटर मात्र हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के पेपर आपको पकड़ाकर नमस्ते बोल देगा या वह कुछ और भी मदद करने के लिए जाना जाता है?
  4. जहां जा रहे हैं, वह किसी विशेष बीमारी का इलाका तो नहीं है?
  5. वहां आप सामान्य घूमने-फिरने के अलावा किन अन्य गतिविधियों में भाग लेंगे? एडवेंचर गतिविधियों के बारे में पहले ही विस्तार से जानकारी प्राप्त कर लें.

इस जानकारी की सहायता से आप संबंधित देश में किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या के लिए पहले से तैयार रह सकते हैं. अब इस तैयारी को और पुख्ता करने की कोशिश करते हैं और जानते हैं कि कैसे हम विदेश में अपने बीमार पड़ने की आशंका कम से कम कर सकते हैं. और अगर बीमार पड़ भी गए तो अपने साथ कौन सा सामान ले जाएं जिससे तुरंत डॉक्टर खोजने की जरूरत न पड़े. कुछ सवाल-जवाबों से यह सब जानने की कोशिश करते हैं.

(1) क्या यात्रा से पहले कुछ बीमारियों के टीके लगवाना ठीक रहेगा?

हां, यह बहुत ठीक रहेगा. मैं यहां आपको विदेश यात्रा पर जाने से पहले लिए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण टीकों के बारे में बताऊंगा. वैसे इन टीकों के बारे में पूरी जानकारी तो आप टीका लगवाते समय अपने डॉक्टर से ही लें. मैं यहां इनका बस बुनियादी परिचय ही दे रहा हूं.

निमोनिया और इन्फ्लूएंजा का टीका

यदि आप साठ साल या उससे ज्यादा उम्र के व्यक्ति हैं तब न्यूमोकोकस निमोनिया का टीका तथा इन्फ्लूएंजा वैक्सीन जरूर लगवाकर जाएं. आजकल तो वैसे भी हम इस उम्र के सभी लोगों को ये टीके यूं भी लगवाने की सलाह देते हैं. पर विदेश यात्रा पर जाना हो तब ये टीके लगवाकर ही जायें. यदि आप कमजोर हैं, हृदय या ब्रोंकाइटिस के मरीज हैं या दमे जैसी कोई सांस की बीमारी रही है तो ये दोनों टीके लगवाना अति आवश्यक है.

हिपेटाइटिस ए और बी के टीके

वैसे ये टीके भी आजकल लोग लगवा ही लेते हैं, लेकिन इनके बारे में भी यही कहा जाएगा कि विदेश यात्रा से पहले ये जरूर लगवाएं. वहां खानपान, पानी आदि की हाइजीन पर सौ प्रतिशत भरोसा न करें. ये टीके आपको वहां इन दो कॉमन हिपेटाइटिस से बचायेंगे.

मेनिन्जाइटिस का टीका

जहां भी बहुत भीड़-भड़क्का हो, वहां मेनिन्जाइटिस अर्थात मष्तिष्क के ऊपर लगे आवरण की झिल्ली के इन्फेक्शन की आशंका बढ़ जाती है. इसीलिए हज के लिये जाने वाले लाखों लोगों को, उस जबरदस्त भीड़ में लंबे समय तक घूमने के दौरान मेनिंजाइटिस पकड़ने का डर बना रहता है. इसलिए यह अनिवार्य है कि वे हज पर मेनिंजाइटिस का टीका लगवाकर ही जायें. अफ्रीका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया (बर्मा, थाईलैंड, कंबोडिया, मलेशिया आदि) की यात्रा करें तो भी इस टीके को लगवा लेना ठीक रहेगा.

क्या टायफॉयड और हैजा (कालरा) के टीके लगवाना भी मददगार होगा?

टायफॉयड हमारे देश में भी वैसे खूब होता है. इसकी वैक्सीन का इंजेक्शन है और मुंह से ली जाने वाली वैक्सीन भी मिलती है. पर यह मात्र 60-70 प्रतिशत बचाव का ही काम करती है. फिर भी यदि कभी किसी विकासशील देश के लंबे भ्रमण का अवसर बने तो टायफॉयड का टीका लगवाकर जा सकते हैं. चूंकि हैजा अब बहुत ही कम होने लगा है सो इसके टीके की आवश्यकता नहीं.

यलो फीवर का टीका

सहारा रेगिस्तान से लगे अफ्रीका और भूमध्य रेखा से लगे साउथ अमेरिका में यलो फीवर की खतरनाक बीमारी कॉमन है. अतः वहां जाने वालों को यह टीका लगवाना जरूरी है. यह टीका केवल अधिकृत केंद्रों पर ही लगता है. ऐसे सरकारी अस्पताल का टीका प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर ही वहां जाने की अनुमति मिलती है. वैसे, इन सारे नियम कायदों के बावजूद आंकड़े बताते हैं कि मात्र पचास प्रतिशत यात्री ही वास्तव में यह वैक्सीन लगवाकर वहां जाते हैं.

डिफ्थीरिया तथा टिटेनस के टीके

ये दोनों बीमारियां अभी-भी पूरी दुनिया में एक समस्या बनी हुई हैं. सो आप यात्रा पर कहीं भी जा रहे हों, ये बीमारियां आपको पकड़ सकती हैं. इन दोनों बीमारियों का एक मिलाजुला टीका होता है. यदि पिछले दस सालों में आपने इसे कभी न लगवाया हो तो यह टीका लगवाकर ही विदेश यात्रा पर जायें. इस बहाने से आपको इन टीकों का बूस्टर लग जायेगा जो लम्बे समय तक आगे भी आपका इन बीमारियों से बचाव करेगा.

रेबीज का टीका

बीते समय में श्रीलंका और थाइलैंड जाने वाले भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ी है. बहुत से लोग काम के सिलसिले में वियतनाम भी जाते हैं. इन देशों की गलियों में भारत की तरह ही आवारा कुत्तों का बड़ा आतंक है. यदि आप ऐसे किसी देश जा रहे हों, खासकर यदि आपको वहां के ग्रामीण इलाकों में भी जाना हो तो मैं सलाह दूंगा कि एन्टी रेबीज वैक्सीन लगवाकर ही वहां जाएं.

(2) यात्रा के लिए क्या मेडिकल किट भी बनाई जाए?

मेडिकल किट जरूर बनाएं और इसमें दवाइयों के संदर्भ में इन बातों का ख्याल रखें.

  1. यदि आप कोई दवाई नियमित रूप से खाते हों तो वह किट में सबसे पहले रखें. इनका कम से कम दस दिनों का अतिरिक्त डोज भी रखें, क्योंकि भाषाई और कुछ कानूनी दिक्कतों के चलते विदेशों में दवा खरीदना मुश्किल काम हो जाता है.
  2. अपने निजी डॉक्टर से सलाह-मशविरा करके दर्द, बुखार और उल्टी-दस्त की दवाइयों के अलावा साथ में इलेक्ट्रॉल या ओआरएस के दो-तीन पैकेट जरूर रखें.
  3. इस किट में किसी ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स भी साथ रखें. सबसे सरल दवा जो आप वहां ले जा सकते हैं, वो है क्यूनोलोन ग्रुप (लीवर फ्लेक्स या ओफ्लोक्स आदि) या एजिथ्रोमाइसिन की गोलियां. यात्रा के दौरान पेट खराब हो या पेशाब में जलन पड़ जाये तो ये कोर्स तीन दिन तक और यदि गला खराब हो या जुकाम-खांसी हो जाये तो पांच-छह दिन तक लें. इस बारे अपने डॉक्टर से भी पहले सलाह-मशविरा कर लें.
  4. डॉक्टर की सलाह से एलर्जी के लिए दवाएं, आंखों में डालने के लिये कोई एन्टीबॉयोटिक ड्रॉप, स्किन की आयंटमेंट भी अपने किट में रखें.
  5. कोई एन्टीफंगल क्रीम जरुर साथ रखें क्योंकि लंबी यात्रा में पसीने से नम वस्त्रों के कारण चमड़ी में फन्गस का इंफेक्शन आपकी यात्रा में लगातार आपको परेशान कर सकता है.
  6. फर्स्ट ऐड का सामान (पट्टी, रूई, स्टियरिंग प्लास्टर, कैंची आदि) भी साथ ले जायें. कभी छोटी-मोटी चोट लग जाए तो यह जरा सी व्यवस्था बड़े काम की सिद्ध होगी.
  7. यदि किसी मलेरिया के प्रकोप वाले इलाके में घूमने जा रहे हैं तो एक मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाली कोई क्रीम, कपड़ों पर चिपक जाने वाली मच्छरों को दूर रखने वाली दवाओं के स्टिकर साथ ले जायें. मलेरिया से बचाव की दवायें भी ले जायें और वहां नियमित लेते रहें ताकि मलेरिया आपके भ्रमण में बाधा न डाल सके.

आखिरी बात यह है अपने डॉक्टर से एक बार इन सभी दवाओं पर सलाह-मशविरा जरूर कर लें.

विदेश यात्रा के दौरान स्वास्थ्य को लेकर कुछ और भी जरूरी बातें हैं जिनकी चर्चा हम इस स्तंभ की अगली कड़ी में करेंगे.