फेसबुक लंबे समय से न सिर्फ फेक न्यूज की समस्या से जूझ रहा था, बल्कि इससे निपटने के लिए तमाम सरकारों के दबाव का भी सामना कर रहा था. वहीं फेसबुक से जुड़े हालिया प्राइवेसी स्कैंडल ने इस सोशल मीडिया वेबसाइट की छवि और खराब कर दी है. पिछले दिनों खबर आई थी कि लंदन स्थित कैंब्रिज एनालिटिका नाम की कंपनी ने फेसबुक यूजर्स के डेटा की चोरी की है. कंपनी पर आरोप है कि इसने लाखों लोगों की निजी जानकारी का इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया था. यह स्कैंडल सामने आने के बाद जहां एक तरफ फेसबुक के शेयरों में नौ प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है तो वहीं यूजर्स से लेकर एडवर्टाइजर्स तक सभी फेसबुक को शक की नजर से देख रहे हैं.

इस मामले में कई दिनों की चुप्पी के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भी माना है कि यूजर्स का डेटा सुरक्षित रख पाने में उनसे चूक हुई है. जुकरबर्ग का कहना ये भी है कि उनके साथ धोखा हुआ है और वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा कैसे हुआ. दूसरी तरफ वॉट्सएप के को-फाउंडर ब्रायन एक्टन सहित कई हस्तियों ने इस मसले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि फेसबुक को डिलीट करने का समय आ गया है.

बीते दो हफ्तों से ट्विटर पर हैशटैग डिलीट फेसबुक लगातार चर्चा में है. इसके साथ ही फेसबुक डिलीट करने या न करने पर भी दुनियाभर में बहस जारी है. इस बीच अगर आप भी अपनी जानकारियों-सूचनाओं के दुरुपयोग की चिंता के चलते अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आखिरी फैसला करने से पहले इस सोच-विचार में कुछ और पहलुओं पर भी गौर कीजिए. हो सकता है तब आपको लगे कि फेसबुक अकाउंट डिलीट करना कोई समझदारी भरा फैसला नहीं है.

सबसे पहली बात तो यही है कि फेसबुक ने अकाउंट डिलीट करने का विकल्प तो दिया है, लेकिन उसे असंभव की हद तक मुश्किल बनाने का भी पूरी इंतजाम किया है. अव्वल तो ढेर सारे विकल्प सही-सही क्लिक करने के बाद आपको अकाउंट डिलीट करने की रिक्वेस्ट कंपनी को भेजनी होती है. फिर इस रिक्वेस्ट को प्रोसेस होने में कई दिनों का वक्त लगता है और अगर आप इस दौरान अपना फेसबुक लॉग इन कर लेते हैं तो रिक्वेस्ट अपने आप कैंसल हो जाती है. इसके बाद आपको नए सिरे से दोबारा सारी प्रक्रिया करने के बाद फिर रिक्वेस्ट भेजनी होती है. इसके बाद आपका अकाउंट पूरी तरह से डिलीट होने में करीब एक सप्ताह से तीन महीने का वक्त भी लग सकता है. इस तरह यह कहा जा सकता है कि फेसबुक पर आप आते तो अपनी मर्जी से हैं, लेकिन जाते फेसबुक की मर्जी से हैं.

इस सारी प्रक्रिया के दौरान फेसबुक यूजर्स को अकाउंट डिलीट करने के बजाय डिएक्टिवेट करने की तरफ धकेलता रहता है. अकाउंट डिएक्टिवेट होने की सूरत में आपका प्रोफाइल और पोस्ट तो फेसबुक पर नजर नहीं आते, लेकिन आपका सारा डेटा फेसबुक के पास सुरक्षित रहता है, जिसे दोबारा कभी-भी अकाउंट लॉग-इन कर एक्सेस किया जा सकता है. डिलीट करने की सूरत में भी फेसबुक के सर्वर से आपका सारा डेटा हट जाता है, यह बात पूरे यकीन से नहीं कही जा सकती. यहां ध्यान देने वाली बात है कि यूजर्स की वे तस्वीरें जो किसी फेसबुक फ्रेंड ने अपलोड की हैं, फेसबुक पर ही रहेंगी. इसके अलावा दोस्तों से की गई चैट भी उनके इनबॉक्स में सुरक्षित रहेगी.

यहां पर अकाउंट डिलीट करने वाले कुछ फेसबुक यूजर्स के अनुभव का जिक्र भी करते चलते हैं. ये अनुभव आपको बताते हैं कि फेसबुक को आपके बारे में उससे कहीं ज्यादा पता है, जितना आप समझते हैं. असल में अकाउंट डिलीट करने से पहले फेसबुक आपके डेटा की कॉपी डाउनलोड करने का विकल्प भी देता है. इसे डाउनलोड करने पर यूजर्स को पता चलता है कि फेसबुक बिना बताए उनकी ऑफलाइन गतिविधियों की जानकारी भी रख रहा था. उन्होंने कब किससे बात की या किसे एसएमएस भेजा, एक-एक गतिविधि का मेटा डेटा (समय, तारीख, ड्यूरेशन) फेसबुक के पास था.

यह ऑफलाइन जासूसी ही वह वजह है जिसके चलते अकाउंट डिलीट करने के बाद भी फेसबुक आपका पीछा नहीं छोड़ता. अगर किसी दोस्त ने अपने कॉन्टैक्ट अपलोड किए हैं और आपका नंबर भी इस लिस्ट में है, तो इसका मतलब है कि फेसबुक आपका नाम और नंबर जानता है. इसकी मदद से आपको ट्रैक कर सकता है. यह प्रक्रिया सोशल ग्राफ कहलाती है. इसमें आपका कोई भी डिजिटल फुटप्रिंट आपको ट्रैक करने के लिए काफी होता है, फिर चाहे वह गूगल सर्च हिस्ट्री ही क्यों न हो.

कई जानकार फेसबुक अकाउंट डिलीट न करने के पीछे यह तर्क देते हैं कि इससे आप बहुत सारे थर्ड पार्टी एप्स को एक्सेस नहीं कर पाएंगे. यह बात बिल्कुल सही है कि आप इन एप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे इसलिए फेसबुक से पीछा छुड़ाना मुश्किल है. वहीं अगर आपको इन एप्स की जरूरत नहीं भी है तो भी इनके पास सुरक्षित डेटा का इस्तेमाल, ये जब तक चाहें तब तक कर सकते हैं. इससे बचने के लिए फेसबुक यूजर्स अपना फेसबुक डिलीट करने के पहले इन थर्ड पार्टी एप्स को हटा सकते हैं या इनका इस्तेमाल आगे भी करते रहने के लिए नए आईडी-पासवर्ड क्रिएट कर सकते हैं. हालांकि फेसबुक एक्टिविटीज के दौरान अपना डेटा हम किसे-किसे दे चुके हैं, हमें खुद नहीं पता होता. नए सिरे से अकाउंट बनाना तो झंझट का काम है ही, वहीं इन्हें ब्लॉक करने के लिए भी सैकड़ों लिंक्स पर जाकर उन्हें क्लिक करना किसी सिरदर्द से कम नहीं है.

इसके अलावा इंस्टाग्राम और टिंडर जैसी वेबसाइट्स फेसबुक अकाउंट के बगैर एक्सेस नहीं की जा सकतीं. फेसबुक से बचकर अगर आप सिर्फ वॉट्सएप से अपना से काम चलाने की सोच रहे हैं तो यह भी अब फेसबुक के पास ही है. इसके अलावा किसी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जाने का विकल्प आपके पास नहीं है. इसके लिए फेसबुक की समझदारी की तारीफ की जानी चाहिए कि उसने वक्त रहते अपने हर प्रतियोगी को खत्म कर दिया. कुल मिलाकर, अगर आप फेसबुक से नाराज हैं या उसे पसंद नही करते तो भले ही अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट कर दीजिए. लेकिन अपना डेटा सुरक्षित करने के लिए ऐसा करना समझदारी भरा कदम नहीं कहा जाएगा. यानी अब जो भी है, मार्क जुकरबर्ग के हवाले है.