सुप्रीम कोर्ट ने लगभग छह महीने तक सुनवाई करने के बाद महात्मा गांधी हत्याकांड की दोबारा जांच कराने का आदेश देने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. खबरों के मुताबिक जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस नागेश्वर राव की पीठ ने कहा, ‘यह याचिका अकादमिक शोध पर आधारित है, जो 70 साल पुराने मामले में दोबारा खोलने के लिए जरूरी आधार नहीं दे सकी है.’ यह याचिका मुंबई के शोधकर्ता और अभिनव भारत के न्यासी डॉ पंकज फडनीस ने लगाई थी. इसमें उन्होंने महात्मा गांधी को चार गोलियां मारे जाने का दावा किया था. पंकज फडनीस के मुताबिक चौथी गोली किसी अज्ञात व्यक्ति ने चलाई थी और उसी से महात्मा गांधी की मौत हुई थी. उन्होंने इसी आधार पर इसकी दोबारा जांच कराने की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सॉलिसिटर जनरल अमरेंद्र शरण को इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया था. उन्होंने जनवरी में अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. इसमें उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद उनके शरीर में लगी गोलियों, हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल, हत्यारों की भूमिका, साजिश और इससे जुड़ी सोच की ठीक तरीके से जांच की गई थी. उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रायल कोर्ट के चार हजार पन्नों के दस्तावेजों और इस मामले में गठित जीवन लाल कपूर जांच आयोग की रिपोर्ट को देखने के बाद ऐसी कोई बात सामने नहीं आई, जिससे इस हत्याकांड की जांच पर सवाल उठाया जा सके. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले छह मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

30 जनवरी 1948 को दिल्ली में नाथू राम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले में नाथू राम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी की सजा दी गई थी. वहीं, विनायक दामोदर सावरकर सबूतों के अभाव में बरी हो गए थे.