तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी- एआईएडीएमके (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) से निष्कासित नेता टीटीवी दिनाकरण को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने उनके नेतृत्व वाले गुट को अलग पार्टी का नाम और नया चुनाव चिह्न दिए जाने पर रोक लगा दी है.

शीर्ष अदालत के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्र और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने इस बाबत दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से चुनाव आयोग के लिए जारी आदेश पर रोक लगाई. साथ ही हाईकोर्ट की कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस गीता मित्तल को आदेश दिया कि वे दो जजों की बेंच बनाएं. वह एआईएडीएमके के दोनों धड़ों (दिनाकरण और मुख्यमंत्री ईके पलानिसामी की अगुवाई वाले) के बीच मुख्य विवाद का अप्रैल के अंत तक निपटारा करे.

ग़ौरतलब है कि पिछले साल 23 नवंबर को चुनाव आयोग ने पलानिसामी की अगुवाई वाले धड़े को असल एआईएडीएमके के रूप में मान्यता दी थी. साथ ही उसे पार्टी का मूल चुनाव चिह्न (दो पत्तियां) भी आवंटित कर दिया था. दिनाकरण ने इस फैसले के ख़िलाफ़ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाई. इसमें उन्होंने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना हक़ ज़ताया. साथ ही एक अंतरिम याचिका भी हाई कोर्ट में दायर की.

अंतरिम याचिका में दिनाकरण ने अपील की कि जब तक पार्टी मूल नाम और चुनाव चिह्न का विवाद नहीं सुलझ जाता उनके गुट को नई पार्टी के तौर पर मान्यता देने का चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए. साथ ही उन्हें नया चुनाव चिह्न (प्रेशर कुकर को वरीयता देते हुए) भी आवंटित किया जाए. इसी अंतरिम याचिका पर हाई कोर्ट ने बीती नौ मार्च को चुनाव आयोग के लिए आदेश जारी किया था जिस पर शीर्ष अदालत ने रोक लगाई है.