फेसबुक डेटा लीक मामले के व्हिलिसब्लोअर क्रिस्टोफर वायली ने विवादित ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका के भारत में कामकाज को लेकर कुछ और जानकारियां साझा की हैं. बुधवार को ट्विटर पर उन्होंने कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका की मूल कंपनी स्ट्रेटजिक कम्यूनिकेशन लेबोरेटरीज (एससीएल) के पास भारत के सभी 600 जिलों और सात लाख गांवों के आंकड़े थे. उनके मुताबिक यह कंपनी भारत में 2003 से काम कर रही थी. इस दौरान इसने राजनीतिक दलों के लिए कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रोजेक्ट किए थे. क्रिस्टोफर वायली ने इसकी तुलना आधुनिक उपनिवेशवाद से की है.

व्हिलिसब्लोअर क्रिस्टोफर वायली ने अपने ट्वीट के साथ कुछ दस्तावेज भी साझा किये हैं. इनके मुताबिक इस कंपनी ने 2003 में राजस्थान में एक प्रमुख पार्टी के लिए सर्वे किया था. वहीं, 2007 में केरल, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में जिहाद के खिलाफ अभियान का समर्थन करते हुए संचार सर्वे किया था. इसके अलावा एससीएल ने 2009 के लोक सभा चुनाव में एक राष्ट्रीय दल का चुनाव प्रचार संभाला था, जबकि 2010 में बिहार में जनता दल (यू) को चुनावी शोध और रणनीति बनाने में मदद की थी. ब्रिटिश कंपनी ने 2012 में एक राष्ट्रीय दल के लिए उत्तर प्रदेश में जाति जनगणना भी की थी. इससे एक साल पहले कंपनी ने पूरे प्रदेश में जातियों के मतदान व्यवहार का भी पता लगाया था.

मंगलवार को ब्रिटिश संसदीय समिति के सामने गवाही के दौरान क्रिस्टोफर वायली ने कांग्रेस को कैंब्रिज एनालिटिका का क्लाइंट बताकर भारतीय राजनीति में उबाल ला दिया था. इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से जवाब मांगा था. वहीं, कांग्रेस ने सरकार को इस मामले की जांच कराने की चुनौती दी थी. हालांकि, कैंब्रिज एनालिटिका ने बयान जारी कर अपने पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर वायली पर संसदीय समिति को झूठी जानकारी देने का आरोप लगाया था.