बहराइच, उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी की सांसद हैं साध्वी सावित्री बाई फुले. वे अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निरोधक कानून) को कथित तौर पर कमजोर किए जाने की कोशिशों से चिंतित हैं. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस पर जो चुप्पी ओढ़ रखी है वह भी उन्हें परेशान करती है. इसीलिए साध्वी सावित्री के ही शब्दों में ‘हमें आज संविधान और बहुजन (निचली जातियों) को बचाने की ज़रूरत है.’

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक साध्वी सावित्री ने एक अप्रैल को लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में एक रैली भी आयोजित की है. इसे उन्होंने ‘भारतीय संविधान बचाओ रैली’ नाम दिया है. अख़बार से बातचीत में वे कहती हैं, ‘कभी कहा जा रहा है कि संविधान बदलने के लिए आए हैं. कभी कहा जा रहा है कि आरक्षण को ख़त्म करेंगे. ऐसे में बाबा साहेब का संविधान सुरक्षित नहीं है. बहुजन समाज का नुक़सान हो रहा है. यह बहुजन समाज के हित की लड़ाई है और लोग पार्टी से ऊपर उठकर इसमें (लखनऊ रैली में) आएंगे.’

वे कहती हैं, ‘संसद से सड़क तक मैं आरक्षण का मसला उठाऊंगी. यह हमारा हक़ है. आरक्षण नहीं होता तो अनुसूचित जाति के मेरे जैसे लोग संसद तक नहीं पहुंचते. डॉक्टर-इंजीनियर नहीं बनते. राष्ट्रपति पद तक नहीं पहुंचते.’ हालांकि वे अपने रुख़ को पार्टी के ख़िलाफ बग़ावत या असंतोष नहीं मानतीं. साध्वी कहती हैं, ‘किसी के अधिकारों की बात करने का अर्थ किसी के ख़िलाफ बग़ावत नहीं है. मैं न ताे किसी से नाराज़ हूं और न ही किसी का विरोध कर रही हूं. बस मुझे यह अहसास हुआ है कि किसी न किसी को लोगों के हक़ के लिए उठना होगा.’