संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार करने के मामले में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पूर्व की यूपीए सरकार को पीछे छोड़ दिया है. डेक्कन क्रॉनिकल की एक खबर के मुताबिक एनडीए सरकार ने सबसे ज्यादा बार अविश्वास प्रस्ताव पर बहस करने से इनकार किया है.

यूपीए के समय में भी अविश्वास प्रस्तावों पर बहस करने से इनकार कर दिया जाता था. उस समय कांग्रेस सांसदों ने खुद सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखा था. आंध्र प्रदेश के विभाजन को लेकर तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के खिलाफ छह सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव रखा था. कांग्रेस ने इसे पार्टी-विरोधी हरकत बताकर सांसदों को पार्टी से निकाल दिया था. इन सांसदों ने नौ दिसंबर, 2013 को पहला अविश्वास प्रस्ताव दिया था. पार्टी से निकालने जाने के बाद 18 दिसंबर, 2013 तक वे हर काम वाले दिन (सात दिन) अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित नोटिस देते रहे. लेकिन तत्कालीन लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने सदन में बहस के लिए नोटिस स्वीकार नहीं किए.

इन दिनों भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जा रहे हैं. पिछले आठ दिनों से विरोधी दल नोटिस दे रहे हैं. लेकिन अध्यक्ष सुमित्रा महाजन उन्हें स्वीकार नहीं कर रही हैं. बुधवार को भी आठवीं बार नोटिस स्वीकार नहीं किया गया. अध्यक्ष का कहना था कि सदन में हो रहे हंगामे के चलते ऐसा करना संभव नहीं है.