कांग्रेस के हाथ से राज्य सभा के उपसभापति का पद भी छिन सकता है. ऐसा हुआ तो बीते 41 साल में यह पहला मौका होगा जब कांग्रेस के हाथ से यह पद फिसल जाएगा. फिलहाल यह पद पीजे कुरियन संभाल रहे हैं जिनका कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है.

सूत्रों के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने जो ख़बर दी है उसके मुताबिक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पूरी कोशिश करने वाली है कि राज्य सभा के उपसभापति के पद पर किसी ग़ैर-कांग्रेसी दल के सांसद को काबिज़ करा दिया जाए. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते भी हैं, ‘इसकी काफ़ी संभावना है कि जुलाई के बाद राज्य सभा के उपसभापति के पद पर कोई ग़ैर-कांग्रेसी नेता नज़र आए. ऐसा होने पर देश के संसदीय इतिहास में पहला मौका होगा संसद के चारों शीर्ष पदों (दोनों सदनों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष) पर कोई कांग्रेसी नहीं होगा.’

भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी कहते हैं, ‘राज्य सभा में अक़्सर ही कांग्रेस ने दोनों पद अपने रखने की कोशिश की है. इसलिए इस बार भाजपा भी ऐसा ही कर सकती है. वह अपने सहयोगी दलों को विश्वास में लेकर उन्हीं में से किसी के सदस्य को उपसभापति बनवाने की कोशिश कर सकती है. ठीक वैसे ही जैसे 2014 में लोक सभा उपाध्यक्ष का पद उसने तमिलनाडु की अपनी सहयोगी पार्टी- एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) को दे दिया था. इस बार वही प्रयोग राज्य सभा में भी दोहराया जा सकता है.’

ग़ौरतलब है कि राज्य सभा के उपसभापति के लिए जुलाई तक चुनाव होगा. लेकिन उच्च सदन में भाजपा या उसकी अगुवाई वाले एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के पास इतनी सदस्य संख्या नहीं है कि वह अपना प्रत्याशी जितवा सकें. कांग्रेस और उसकी अगुवाई वाले यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) का संख्या बल तो एनडीए से भी कम है. ऐसे में अन्य दलों की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है. और भाजपा सूत्रों की मानें तो इन्हीं अन्य दलों में से किन्हीं एक-दो को भाजपा अपने साथ जोड़ने की रणनीति बना रही है.