उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार ने सभी शासकीय दस्तावेजों में डॉ बीआर अंबेडकर का नाम ‘भीमराव रामजी आंबेडकर’ करने का आदेश जारी किया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक राज्यपाल राम नाईक की सिफारिश पर बुधवार को जारी आदेश में सरकारी विभागों के साथ-साथ इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ और इलाहाबाद शाखाओं को भी डॉ भीमराव अंबेडकर या बीआर अंबेडकर की जगह डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर लिखने को कहा गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक डॉ भीमराव अंबेडकर के नाम में ‘अंबेडकर’ की हिंदी स्पेलिंग में भी बदलाव किया गया है. अब हिंदी में ‘अंबेडकर’ की जगह ‘आंबेडकर’ लिखा जाएगा. बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर महासभा के निदेशक डॉ लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा, ‘असल बात नाम का उच्चारण है. अंग्रेजी की स्पेलिंग सही है, लेकिन हिंदी में स्पेलिंग और उच्चारण बदल जाता है.’ नाम में ‘रामजी’ जोड़ने पर उन्होंने कहा कि डॉ बीआर अंबेडकर के पिता का नाम ‘रामजी’ था और महाराष्ट्र में पिता का नाम बेटे के नाम के बीच जोड़ने का सामान्य प्रचलन है. हालांकि, आदित्यनाथ सरकार ने भारतीय संविधान की प्रति पर डॉ भीमराव अंबेडकर के हिंदी में हस्ताक्षर को आधार बनाया है. इसमें उन्होंने अपना नाम ‘भीमराव रामजी आंबेडकर’ लिखा था.

आदित्यनाथ सरकार के इस कदम को सियासत से प्रेरित बताया जा रहा है. द फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक सपा नेता दीपक मिश्रा ने कहा कि भाजपा डॉ अंबेडकर या उनकी विचारधारा का सम्मान नहीं करती है, लेकिन उसने खास वोट बैंक को आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया है. हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इन आरोपों से भाजपा का बचाव किया है. आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं है, उत्तर प्रदेश सरकार ने केवल भारतीय संविधान के जनक डॉ बीआर अंबेडकर के वास्तविक नाम को इस्तेमाल करने का फैसला किया है.