सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी है. खबरों के मुताबिक गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अन्ना हजारे से मुलाकात की और सरकार द्वारा उनकी मांगों को मान लिए जाने का भरोसा दिलाया. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की मांगों में सशक्त लोकपाल की नियुक्ति के अलावा किसानों को उनकी फसलों की वाजिब कीमत दिलाना शामिल है. वे 23 मार्च से दिल्ली के रामलीला मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे थे.

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अनशन शुरू करने से पहले मोदी सरकार पर निशाना साधा था. केंद्र सरकार को अहंकारी बताते हुए उन्होंने 30 से ज्यादा पत्रों का जवाब न देने का आरोप लगाया था. इसके अलावा धरने के पहले दिन भी अन्ना हजारे ने कहा था कि मोदी सरकार आंदोलनकारियों को दिल्ली आने से रोकने की कोशिश कर रही है.

अन्ना हजारे ने 2011 में भी भ्रष्टाचार रोधी ओम्बुड्समैन (लोकपाल) की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में भूख हड़ताल की थी. तब केंद्र में कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार थी. इसके बाद उन्होंने 2012 में 12 दिन के लिए हड़ताल की थी, जिसके बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने लोकपाल विधेयक पारित कर दिया था. हालांकि, लोकपाल की नियुक्ति अभी तक नहीं हो पाई है.