विवादित ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका (सीए) ने कांग्रेस पार्टी को भी अपनी सेवाएं दी थीं. हालांकि कांग्रेस ने अब तक इससे इनकार ही किया है. लेकिन अब कुछ दस्तावेज़ भी सामने आए हैं जो उसकी बात को झुठलाते नज़र आते हैं. इन दस्तावेज़ों के आधार पर आई ख़बरों में बताया गया है कि 2012 में सीए की भारतीय शाखा एससीएल (स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन लेबोरेटरीज) इंडिया ने कांग्रेस को चुनाव रणनीति के बाबत कुछ पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिए थे.

डीएनए अख़बार ने दावा किया है कि उसके पास उन पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन की प्रतियां सुरक्षित हैं जो एससीएल इंडिया ने कांग्रेस को दिए थे. इसमें कंपनी ने पार्टी को अपने काम करने के ढर्रे में बदलाव से जुड़े कुछ सुझाव दिए थे ताकि मतदाताओं तक पार्टी की बात बेहतर ढंग से पहुंचाई जा सके. यही नहीं उसने कुछ ऐसी सेवाएं देने की भी पेशकश की थी जो दूसरे दलों में जासूसी करने जैसी ही मानी जाती हैं.

एससीएल ने प्रजेंटेशन में दावा किया था कि उसके पास काफ़ी स्थानीय जानकारियां हैं और उनसे चुनाव प्रबंधन बेहतर ढंग से किया जा सकता है. इस प्रजेंटेशन का हिस्सा बिहार चुनाव की रणनीति से भी जुड़ा था. इसका शीर्षक था, ‘फाइंडिंग आईएनसी बिहार’ इसमें कहा गया था कि कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष ‘राहुल गांधी की सभाओं में भीड़ तो जुटती है लेकिन पार्टी उसे वोट में नहीं बदल पाती.’

इसमें आगे बताया गया था, ‘कांग्रेस के पास ऐसा कोई तंत्र नहीं है कि वह अपने मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक ले जा सके. यहां तक कि पार्टी के उम्मीदवार भी राहुल गांधी को एक नेता के बजाय सेलेब्रिटी की तरह आम लोगों के सामने पेश करते हैं.’ ग़ौरतलब है कि इससे पहले ब्रिटिश व्हिसिलब्लोअर क्रिस्टोफर वायली ने भी ख़ुलासा किया था कि भारत में उसकी (सीए की) क्लाइंट कांग्रेस थी.