केंद्र सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए पासपोर्ट के नियम कड़े कर दिए हैं. भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों की जांच का सामना कर रहे नौकरशाहोंं को सतर्कता विभाग की तरफ से पासपोर्ट के लिए मंजूरी नहीं मिलेगी. निलंबन या किसी दूसरी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे नौकरशाहों के लिए भी यही नीति अपनाई जाएगी. खबरों के मुताबिक केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने यह फैसला भ्रष्टाचार को कम करने के लिए किया है.

ताजा दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि नौकरशाहों के खिलाफ अगर किसी ने कोई निजी शिकायत की है तो ऐसे मामले में नई नीति पर अमल तभी किया जा सकता है जब जांच एजेंसी चार्जशीट दायर कर चुकी हो. ऐसे मामलों में एफआईआर की कॉपी पासपोर्ट कार्यालय को दी जा सकती है जो अपने विवेक के आधार पर इसे लेकर फैसला कर सकता है.

हालांकि मेडिकल इमर्जेंसी की हालत में इस नियम में थोड़ी ढील दी जा सकती है. विदेश में रह रहे उनके परिजनों के बीमार होने पर भी ऐसा किया जा सकता है और परिवार में किसी शादी के मामले में भी. हालांकि ऐसे मामलों में यात्रा की जरूरत और गंभीरता के लिहाज से आखिरी फैसला करने का अधिकार कर्मचारी के संबंधित विभाग पर छोड़ा गया है.