‘कल से देश में नए संचार नियम लागू हो रहे हैं. सभी फ़ोन कॉलों को रिकॉर्ड कर सेव रखा जाएगा. वॉटसएप, ट्विटर और फ़ेसबुक समेत सभी सोशल मीडिया पर नज़र रखी जाएगी. इससे अनजान लोगों को इसकी जानकारी दें. आपकी तमाम डिवाइस सरकार के मंत्रालयों से जुड़ी हुई हैं. ग़ैर-ज़रूरी संदेश भेजने से बचें. अपने बच्चों, मित्रों और रिश्तेदारों को कहें कि वे इस बात का ध्यान रखें. सरकार या प्रधानमंत्री आदि के बारे में कोई राजनीतिक ख़बर या जानकारी आगे फ़ॉरवर्ड न करें. पुलिस ने इसे साइबर अपराध की श्रेणी में रख दिया है. ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. इसलिए कृपया इस संदेश को डिलीट न करें और अन्य लोगों की भी बताएं. यह सच है और बहुत गंभीर मामला है. सभी सोशल मीडिया (वॉट्सएप) ग्रुप इस बारे में सावधान रहें.’

सोशल मीडिया पर यह संदेश बीते तीन-चार दिनों से वायरल है. दावा है कि देश में ‘कल से’ नए संचार नियम लागू हो रहे हैं जिनके तहत सरकार इंटरनेट पर हमारी हरेक गतिविधि पर नज़र रखेगी. मैसेज इतना डराने वाले अंदाज़ में लिखा गया है कि सोशल मीडिया की फ़र्ज़ी ख़बरों को समझने वाले भी इस दावे की अनदेखी करने से पहले एक बार के लिए सोच में पड़ जाएं. तो क्या इस संदेश को गंभीरता से लिया जाना चाहिए?

नहीं. यह दावा पूरी तरह से झूठा है. सरकार ऐसे कोई नियम लागू नहीं करने जा रही. भारत में संचार संबंधित नियम तय करने का काम भारतीय दूरसंचार अधिनियम प्राधिकरण यानी ट्राइ का है. हाल के समय में उसने ऐसा कोई नोटिफ़िकेशन जारी नहीं किया है जिसमें तमाम सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों सरकारी निगरानी की बात कही गई हो. जानकारों के मुताबिक लोकतंत्र में इस तरह के नियम नागरिकों की निजी जिंदगी में सीधा हमला हैं. ऐसा करके सरकार लोगों के ज़बरदस्त ग़ुस्से का सामना नहीं करना चाहेगी. ट्राइ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इसकी जांच की जा सकती है. वहां इस संबंध में कोई सूचना नहीं है. इसके अलावा ऐसी कोई हालिया ख़बर भी नहीं है जिसमें इस दावे से संबंधित कोई भी जानकारी दी गई हो. हां, गूगल करने पर इस झूठ की पोल ज़रूर खुल जाती है.

यह दावा झूठा है इसका सबसे बड़ा सबूत यही है कि पिछले साल भी बिलकुल यही संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. तब भी अप्रैल महीने के आसपास कहा गया था कि ‘कल से’ नए संचार नियम लागू होंगे. इसी भाषा शैली में लोगों को डराया गया था. कहा गया कि नए नियम लागू होने के बाद हमें हरेक जानकारी को शेयर करने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा. अप्रैल बीत गया और दावा झूठा साबित हुआ. इस साल भी अप्रैल के शुरू होने से कुछ दिन पहले यह मैसेज फिर वायरल हुआ. इस बार के दावे में फ़र्क़ केवल इतना है कि इस बार इसमें ‘मिनस्ट्री ऑफ इंटीरियर रेगुलेशन’ का ज़िक्र नहीं है. ऐसा शायद इसलिए क्योंकि ऐसा कोई मंत्रालय भारत में है ही नहीं. प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो की वेबसाइट पर जाकर इसकी पुष्टि हो जाती है.

इस पोस्ट के झूठे होने का एक और सबूत यह भी है कि यह केवल भारत में ही वायरल नहीं हो रही बल्कि सऊदी अरब, घाना, जांबिया, यूएई और अन्य देशों में भी शेयर की जा रही है. यानी यह दावा तो अंतरराष्ट्रीय झूठ साबित हुआ है.