कर्नाटक विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ-साथ राज्य में सियासी पारा बढ़ता जा रहा है. सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के छोटे-बड़े नेता एक-दूसरे के ख़िलाफ़ जमकर बयानबाज़ी कर रहे हैं. चुनाव है तो राजनीतिक दलों के समर्थकों ने भी अलग-अलग मोर्चे संभाल लिए हैं. कुछ ज़मीन पर काम कर रहे हैं तो कुछ सोशल मीडिया पर प्रचार-कुप्रचार करने में लगे हुए हैं. इसी सिलसिले में एक पोस्ट तमाम सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर वायरल है. इस पोस्ट में दो तस्वीरों के हवाले से यह साबित करने की कोशिश की गई है कि भाजपा ने कर्नाटक चुनाव में ‘पैसे का खेल’ शुरू कर दिया है.

इस पोस्ट की एक तस्वीर में 2,000 रुपये के नोट के कई बंडल देखे जा सकते हैं. यह बहुत भारी रक़म है. दूसरी तस्वीर में कुछ लोग दिख रहे हैं. उनमें एक पुलिसकर्मी भी है. इन दोनों तस्वीरों को जोड़कर जो बात कही जा रही है वह कुछ यूं है- ‘मोदी जी को बधाई हो. भाजपा के विधायक सुधीर गाडगिल की कार से 20 हज़ार करोड़ की नई करंसी पकड़ी गई है. सारा पैसा कर्नाटक चुनाव में इस्तेमाल होने वाला था. ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें और लोकतंत्र को बचाएं.’

इस दावे की सच्चाई क्या है, इसके लिए दोनों तस्वीरों पर थोड़ा गौर करते हैं. जानकारों के मुताबिक पहला सवाल तो यही है कि 2,000 रुपये के नोटों के जितने बंडल दिखाए गए हैं उतने बंडल क्या एक गाड़ी में आ सकते हैं. मुश्किल लगता है. दूसरा, जितने बंडल दिखाए गए हैं क्या वे 20,000 करोड़ रुपये हैं. 2,000 रुपये के नोट के एक बंडल में 100 नोट होते हैं. यानी एक बंडल में दो लाख रुपये होते हैं. इस तरह अगर 2,000 रुपये के बंडलों में 20,000 करोड़ रुपये इकट्ठा करने हों तो उसके लिए दस लाख बंडल लगेंगे. इतने बंडलों के लिए कितनी गाड़ियों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है यह भी फ़ेक न्यूज़ के खिलाड़ी ही बता सकते हैं.

अब इस वायरल पोस्ट का सच बताते हैं. दरअसल जिस तस्वीर में कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं वह महाराष्ट्र की है. यह 14 नवंबर, 2016 की बात है. जिस गाड़ी में 2,000 के नोट होने का दावा किया जा रहा है वह सांगली अर्बन बैंक की थी और उसमें 2,000 के नहीं बल्कि 500 और 1,000 रुपये के नोट थे जो नोटबंदी की घोषणा के बाद अमान्य हो गए थे. इन नोटों को बैंक की अलग-अलग शाखाओं से इकट्ठा कर बैंक के मुख्यालय ले जाया जा रहा था. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ गाड़ी में छह करोड़ रुपये थे. गाड़ी जब उस्मानाबाद-तुलजापुर बायपास रोड के पास पहुंची तो चुनाव अधिकारियों ने उसे रोक कर अपनी कस्टडी में ले लिया.

बाद में पता चला कि गाड़ी बैंक की है और उसमें मौजूद रुपये बैंक के मुख्यालय ले जाए जा रहे थे. बैंक के चेयरमैन गणेश गाडगिल ने मीडिया को बताया था कि गाड़ी ले जा रहे ड्राइवर के पास बैंक से संबंधित सभी दस्तावेज़ थे. बाद में अधिकारियों ने गणेश गाडगिल को क्लीन चिट दे दी थी. इस मामले में एक ट्विस्ट यह है कि गणेश गाडगिल भाजपा नेता सुधीर गाडगिल के भाई हैं. भाजपा विरोधी जानते थे कि सोशल मीडिया पर भाजपा और नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ ग़लतफ़हमी की आग फैलाने के लिए इतना सामान काफ़ी है. यह रणनीति कारगर भी साबित हुई क्योंकि यह झूठी पोस्ट ज़बरदस्त वायरल हुई है.

वहीं, नोटों के बंडलों वाली तस्वीर की बात करें तो यह नोटबंदी के समय किसी बैंक या सरकारी कार्यालय की बताई जा रही है. ये दोनों तस्वीरें 2016-17 से ही अलग-अलग कहानियों के साथ शेयर हो रही हैं. इस बार यह कर्नाटक विधानसभा चुनाव के काम आ रही हैं.

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