केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) भी अब मुसीबत बनने जा रही है. नाराज़गी कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर केंद्र के ढुलमुल रवैये से है. इस मसले पर शनिवार को तमिलनाडु सरकार केंद्र के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर चुकी है.

ख़बरों के मुताबिक कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन में केंद्र की टालमटोल के ख़िलाफ़ एआईएडीएमके सोमवार दो अप्रैल को पूरे तमिलनाडु में एक दिन की भूख हड़ताल कर रही है. इसके तहत पार्टी के विभिन्न नेता अलग-अलग स्थानों पर अनशन करेंगे. यही नहीं पार्टी ने संसद में इस मसले पर अपना विरोध प्रदर्शन भी जारी रखने का निश्चय किया है. साथ ही लोक सभा उपाध्यक्ष और एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता एम थंबीदुरई ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी भी केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ सदन में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देगी.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी फरवरी को एक आदेश के जरिए कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड गठित करने के लिए गुरुवार 30 मार्च तक की समय सीमा तय की थी. लेकिन केंद्र ने अब तक बोर्ड का गठन नहीं किया है. इसके बजाय बीते शनिवार को ही उसने शीर्ष अदालत में हलफ़नामा दायर कर इसके लिए तीन महीने का समय मांगा है. इसमें उसने दलील दी है कि कर्नाटक में मई में विधानसभा चुनाव हैं. ऐसे में इस वक़्त कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड गठित किया गया तो राज्य में बवाल हो सकता है. इससे चुनाव प्रक्रिया तो प्रभावित होगी ही कानून-व्यवस्था की समस्या भी खड़ी हो जाएंगी.